दौसा. करौली में नियम कायदों को धता बताकर दौड़ती क्षतिग्रस्त स्कूल बस से गिरकर एक मासूम की मौत होने की घटना ने निजी विद्यालयों में परिवहन व्यवस्था के नाम पर हो रही अनदेखी को उजागर कर दिया है। दौसा जिले में भी बाल वाहिनियों के नाम पर चल रही बसों, टेम्पो व ऑटो आदि की हालत खराब है। स्कूल प्रबंधन व वाहन संचालकों को मात्र कमाई से मतलब है, वहीं जिम्मेदार परिवहन, पुलिस व शिक्षा विभाग के अधिकारी भी आंखें मूंदकर बैठे हैं। गत चार-पांच माह से विद्यालय के बच्चों को ले जा रहे वाहनों की जांच नहीं की गई है। खुलेआम नियमों के विरुद्ध वाहन बच्चों का परिवहन कर रहे हंै। शहर में चलने वाले ऑटो जिनकी अधिकतम सवारियों की क्षमता छह है, वे भी दोगुने 10-12 बच्चे भरकर ले जाते हैं। मैजिक ऑटो के संचालक तो 20 से 25 तक बच्चों को भर रहे हैं। इसके अलावा बसोंं का भी यही हाल है। खास बात यह है कि अभिभावकों को भी चेतने की जरूरत है। वे भी देखें कि उनके बच्चे किस तरह के वाहन में सफर कर रहे हंै। अभिभावकों का दबाव रहेगा तो स्कूल प्रशासन को नियमों के अनुसार की वाहनों का संचालन करना पड़ेगा।
नियम बाल वाहिनी लिखा होने का, लेकिन धड़ल्ले से दौड़ रही हैं प्राइवेट बसें
जिला मुख्यालय पर महंगी स्कूलों में खासकर नियमों की अनदेखी की जा रही है। शहर में लग्जरी सवारी बसों का परिवहन करने वाले अपनी बसों को स्कूल के बच्चे लाने ले जाने में भी काम ले रहे हैं, जबकि स्कूलों में पीले रंग की बाल वाहिनी की संचालित होती है। अधिकारियों से सांठ-गांठ कर बस व स्कूल संचालक बेरोकटोक परिवहन कर रहे हैं।
बिना फिटनेस दौड़ रहे वाहन
करौली में जिस बस से हादसा हुआ, उसकी फिटनेस वैधता खत्म हुए डेढ़ साल से अधिक बीत चुका था। इसी तरह दौसा जिले में भी दर्जनों वाहन बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के ही दौड़ रहे हैं। अधिकारियों की लापरवाही इससे उजागर होती है कि करौली हादसे के बाद जब दौसा जिले में परिवहन विभाग ने अपने फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने से संबंधित कागजात खंगाले तो सात दर्जन वाहनों की फिटनेस समाप्त पाई गई है। इस आंकड़े को देखकर अधिकारियों में भी खलबली मच गईहै और अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
ऐसा होना चाहिए
- स्कूली वाहन के आगे और पीछे बाल वाहिनी और बच्चों की गाड़ी लिखा होना चाहिए।
- चालक-परिचालक निर्धारित ड्रेस पहनें
- स्कूली बसों मेंं सीसीटीवी कैमरे लगें
- स्पीड गर्वनर होना चाहिए
- स्कूली वाहन के मालिक और सवारी बैठने की क्षमता लिखी हो
- प्राथमिक मेडिकल बॉक्स हो
- आरटीओ से फिटनेस प्रमाण पत्र जारी हो
- वाहन में सफर करने वाले बच्चों के नाम-पाता और ब्लड गु्रप तक की सूची चस्पा हो
- जीपीएस सिस्टम लगा हो
- चालक-परिचालक का पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया हो
- बच्चों की सीट बैल्ट होनी चाहिए
क्या कहते हैं जिम्मेदार
फिटनेस की जांच शुरू, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई
स्कूलों में लगे वाहनों की फिटनेस जांच कराई जा रही है। सघन अभियान चलाकर वाहनों की जांच कराएंगे। जिले में 580 बसें आटो, मैजिक टेम्पो आदि लगे हुए हैं। जो स्कूल संचालक, वाहन चालक इसमें लापरवाही करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। करौली हादसे के बाद परिवहन निरीक्षक को निलम्बित कर दिया गया है।
राजीव कुमार
प्रादेशिक परिवहन अधिकारी, दौसा
जिले के विद्यालयों में बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के चल रहे वाहनों की जानकारी एकत्र कर कर रहे है। ऐसे में जिले में 84 वाहनों की फिटनेस समाप्त पाई गई है। इसके लिए संबंधित को नोटिस जारी किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।
रामेश्वर गर्ग, जिला परिवहन अधिकारी, दौसा
हमने परिवहन विभाग से बात की है। पुलिस विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं। मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
प्रहलादसिंह कृष्णियां, पुलिस अधीक्षक दौसा
वैसे तो हर बार सभी अधिकारियों व स्कूलों को वाहनों से संबंधित निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन करौली में हुए हादसे के बाद अब विशेष रूप से सभी ब्लॉक अधिकारियों को निजी स्कूलों की परिवहन व्यवस्था की जांच के लिए कहा जाएगा।
डॉ. प्रेमवती शर्मा, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी दौसा






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