पाली। शिक्षा विभाग में अंधेर नगरी चौपट राजा वाली कहावत पूरी तरह से चरितार्थ होती है। इसमें शिक्षक पढ़ाने में रुचि नहीं लेते तो संस्था प्रधान ऑनलाइन के कार्य आदि करने में ध्यान नहीं देते। अधिकारियों की बात करें तो उनकी भी कार्यप्रणाली कुछ ऐसी ही है। इसका ताजा उदाहरण है प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए उडऩ दस्ते के आदेश जारी करने का। विभाग की ओर से उच्च माध्यमिक परीक्षा 2019 के नियमित विद्यार्थियों के लिए प्रायोगिक परीक्षा 24 जनवरी से करवाने के आदेश दिए गए। विद्यालयों को यह आदेश भी प्रेषित कर दिए गए।
इसके बाद विभाग को याद आया कि परीक्षा संचालन में किसी तरह की अनियमितता नहीं होनी चाहिए। परीक्षा पर प्रभावी नियंत्रण रखा जाना चाहिए। परीक्षा केन्द्रों का सघन निरीक्षण व पर्यवेक्षण होना चाहिए। इस पर निदेशक माध्यमिक शिक्षा की ओर से 30 जनवरी को एक आदेश जारी किया गया। इसमें राज्य स्तरीय उडऩ दस्ते का गठन किया गया। ऐसे में यदि किसी स्कूल ने पहले परीक्षा ले ली है और अनियमितता हुई तो इसकी किसी अधिकारी को खनक तक नहीं लग पाई होगी।
23 फरवरी तक चलेगी
नियमित परीक्षार्थियों के लिए यह प्रायोगिक परीक्षा 23 फरवरी तक आयोजित की जा सकती है। जबकि स्वयंपाठी परीक्षार्थियों की परीक्षा 18 फरवरी से शुरू होगी। जो 21 फरवरी तक ली जा सकती है।
उडऩ दस्ता यह करेगा कार्य
निदेशक की ओर से गठित राज्य स्तरीय उडऩ दस्ता प्रायोगिक परीक्षा के दौरान राज्य में स बन्धित जिला शिक्षा अधिकारियों से समुचित स पर्क समन्वय रखेगा। दल राजकीय व गैर राजकीय शिक्षण संस्थाओं में बोर्ड निर्धारित प्रायोगिक परीक्षा केन्द्रों का परीक्षा के दौरान निरीक्षण व सम्बन्धित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की ओर से बोर्ड परीक्षा के लिए संधारित अभिलेखों का पर्यवेक्षण करेगा।
परीक्षा की तैयारियां पूरी कर ली
प्रायोगिक परीक्षा को लेकर तैयारियां पूरी कर ली है। विद्यार्थियों को भी प्रायोगिक परीक्षा की जानकारी दी गई है। इसके लिए अभिलेख संधारित करवाए गए है। -विनोदकुमार शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी मा. मुख्यालय, पाली
इनको सौंपा गया राज्य स्तरीय उडऩ दस्ते का दायित्व
संयोजक : प्रकाशचंद जाटोलिया, उप निदेशक माध्यमिक, कार्यालय
हाजा सह संयोजक : अरुण कुमार शर्मा, सहायक निदेशक व राजेन्द्र प्रसाद मील, सहायक निदेशक, कार्यालय हाजा
सदस्य : सुभाष माचरा, शैक्षणिक प्रकोष्ठ अधिकारी, कार्यालय हाजा, डॉ. प्रमोद कुमार चमोली अनु. अधिकारी, कार्यालय हाजार व नीरज काण्डपाल, व्याख्याता, कार्यालय हाजा





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