Breaking News
recent

रात होते ही पवित्र झील में उतरते हैं 'शिकारी'

जितेन्द्र पालीवाल @ राजसमंद. राज्य सरकार ने पुष्कर के पवित्र जलाशय के अलावा राजसमंद झील के भी धार्मिक महत्व के मद्देनजर इसमें मत्स्याखेट प्रतिबंधित किया, मगर यह रोक सिर्फ कागजों में सिमटकर रह गई है। रात के अंधेरे में झील के दुश्मन पानी में मछलियों के बीच कोहराम मचा रहे हैं। पत्रिका की पड़ताल में सामने आया कि झील में नौचौकी, लाल बंगला, कमल बुर्ज, अदब की छतरी, सेंवाली और इन इलाकों के आसपास झील किनारे रात के अंधेरे में बड़े ट्यूब्स लेकर उतरते हैं। जाल फेंककर मछलियां फांसते हैं और इकट्ठी करके भोर फूटने से पहले निकल भागते हैं। अवैध मत्स्याखेट करने वाले आसपास के इलाकों से आ रहे हैं, जिनमें ज्यादातर 20 से 30 साल के युवा हैं। ये शिकारी शहर की कुछ बस्तियों के अलावा आसपास के गांवों से भी आ रहे हैं। हर रात में करीब तीन से चार क्विंटल मात्रा में मछलियों का अवैध रूप से शिकार किया जा रहा है। रोहू, कतला, मृगल आदि प्रजाति की मछलियों का शिकार जमकर हो रहा है। पिछले कुछ दिनों से यह सिलसिला और तेज हो गया है। शहरवासियों और श्रद्धालुओं में इसे लेकर खासी नाराजगी है। कई मौकों पर शहर के लोगों ने झील से बड़ी संख्या में जाल निकालकर सार्वजनिक रूप से जलाए हैं, लेकिन शिकारी बाज नहीं आ रहे हैं।

बिक जाती है हाथों-हाथ
ताजा मछलियों की बिक्री सुबह होते ही हाथों-हाथ स्थानीय बाजार में ही हो जाती है। कांकरोली के मुखर्जी चौराहा, राजनगर क्षेत्र में कई अवैध दुकानों पर झील से पकड़ी गईं मछलियां बिक रही है। कई शिकारी इनकी मांग के अनुसार सीधे घरों तक सप्लाई कर देते हैं।

यहां कौन डाले सीड्स
नियमानुसार जिस जलाशय का ठेका दिया जाता है, वहां ठेकेदार को मत्स्याखेट के निश्चित अनुपात में सीड्स (बीज मछली) डालने होते हैं। ठेके की इस शर्त की पालना के लिए मत्स्य अधिकारियों की ओर से भी मॉनिटरिंग की जाती है, मगर राजसमंद झील में वैध रूप से कोई ठेका नहीं होने से मछलियों के सीड्स डालने का कोई प्रबंध नहीं है। ऐसे में जलाशय में मछलियों की घटत पारिस्थितिकीय तंत्र के लिए भी खतरनाक है।


पुलिस की नजरों से शिकारी चुरा रहे काजल!
राजसमंद झील किनारे राजनगर और कांकरोली थाना पुलिस की रात्रि गश्त लगती है। दोनों थानों की गाडिय़ां नौचौकी और सिंचाई उद्यान की ओर निगरानी करती है, लेकिन सवाल यह कि इसके बावजूद इन्हीं इलाकों में शिकारी रात के अंधेरे में पानी में उतरते हैं और बड़ी तादाद में मछलियां पकड़कर ले भागते हैं।


लाचार है सिंचाई विभाग
झील का मालिकाना हक सिंचाई विभाग का है। फिर भी झील में हो रहे अवैध मत्स्याखेट को रोकने में वह बिल्कुल भी गम्भीरता नहीं दिखा रहा है। यही नहीं, पुलिस भी कभी-कभार फौरी तौर पर छिट-पुट कार्रवाई कर भूल जाती है। लगातार निगरानी और कड़ी कार्रवाई नहीं होने से शिकारियों के हौसले बुलंद हैं।

पैंथर तक की चली गई थी जान
जनवरी, 2016 के पहले पखवाड़े में झील के छिछले पानी में शिकारियों द्वारा डाले गए जाल में फंसने से एक पैंथर की मौत हो गई थी। दो दिन पुराना उसका शव मिला था। उस घटना ने अवैध शिकार की चिंताजनक स्थिति को उजागर कर दिया था, लेकिन उसके बाद भी न तो प्रशासन सतर्क हुआ, न पुलिस ने कोई ध्यान दिया।

जिम्मेदार बेपरवाह
पवित्र झील में मछलियों का शिकार हो रहा है। हमने कई बार मौखिक शिकायत की, लेकिन जिम्मेदारों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
अशोक टांक, नेता प्रतिपक्ष, नगर परिषद

निगरानी बढ़ाएंगे
अगर ऐसा हो रहा है, तो विभाग के स्टॉफ को निगरानी बढ़ाने के लिए पाबंद करेंगे। साथ ही पुलिस की मदद से शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
औंकारलाल बैरवा,
अधिशासी अभियंता,
सिंचाई विभाग, राजसमंद



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.