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कागजों में अटका राज्य का पहला खेल विवि

झुंझुनूं. प्रदेश में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई खिलाड़ी देने वाले जिले में खेलों के विकास के हाल ठीक नहीं हैं। झुंझुनूं में खुलने वाला प्रदेश का पहला खेल विश्वविद्यालय कागजों से बाहर नहीं आया है। ना ही इसके स्थान पर घोषित की गईखेल एकेडमी बयानों से बाहर आई है।वर्ष 2011 में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बजट में निजी जनसहभागिता पीपीपी मोड में प्रदेश के पहले खेल विवि झुंझुनूं में खोलने की घोषणा की थी। लेकिन यह प्रयास सफल नहीं हो पाया। फिर दिसंबर 2012 में सरकार ने निकट के गांव दोरासर में प्रदेश के पहले सरकारी खेल विश्वविद्यालय की घेाषणा की तो खिलाडिय़ों में खुशी की लहर दौड़ गई। दोरासर गांव के चारागाह भूमि आवंटित होने के बाद जुलाई 2013 में डा. शैलेंद्रकुमार सिन्हा को खेल विश्वविद्यालय का प्रथम कुलपति नियुक्त किया गया। मगर वे यहां पर नहीं आए। इसके एक माह बाद फिर डॉ. एलएस राणावत को नया कुलपति लगाया गया। वे केवल एक बार झुंझुनूं आए थे। अगस्त 2013 में परशुराम को पहला विशेषाधिकारी (ओएसडी) नियुक्त किया। इनके दस दिन बाद ही उनकी जगह किशोर कुमार को नया ओएसडी लगा दिया गया। इनके कार्यग्रहण करने से पहले इनका तबादला हो गया। इसकी जिम्मेदारी झुंझुनूं एडीएम को सौंपी गई। वहीं, राज्य सरकार ने एथलीट के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रामवतार जाखड़ को विवि का नया सलाहकार नियुक्त किया। ऐसे में कई महीनों तक वेतन उठता रहा।

 

क्रीड़ा एकेडमी के लिए अब ये होगा
खेल विवि के स्थान पर अब पटियाला की तर्ज पर राष्ट्र स्तरीय क्रीड़ा एकेडमी का खोला जाना प्रस्तावित है। इसके लिए राज्य क्रीड़ा परिषद ने 33 करोड़ रुपए का बजट मंजूर भी किया। लेकिन अभी तक इसके कामकाज को लेकर कोई प्रयास नहीं हुए। खेल विश्वविद्यालय के स्थान पर क्रीड़ा एकेडमी की यह घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने अंतिम बजट में की थी।

 

50.58 हैक्टेयर में बनना था
प्रदेश के पहले खेल विश्वविद्यालय के लिए कुलोद ग्राम पंचायत के राजस्व गांव दोरासर में 50.58 हैक्टेयर जमीन चिह्नित की गई। जमीन के चिह्निकरण के बाद आवंटित भी कर दी गई। आवंटित जमीन पर खेल एकेडमी को लेकर कोईगतिविधि नहीं हुई। यहां पर केवल कंटीली झाडिय़ों के अलावा कुछभी नहीं हैं।

 

राजनीति में उलझे युवाओं के सपने
प्रदेश स्तरीय खेल विश्वविद्यालय के स्थान पर क्रीड़ा एकेडमी खुलवाने के पीछे राजनीतिक मायने बताए जा रहे हैं। जानकार बताते हैं कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने इसकी घोषणा की थी। भाजपा सरकार के आने के बाद इसका श्रेय कांग्रेस के खाते में नहीं जाए। ऐसे में उन्हें खेल विवि को काफी वक्त तक कागजों में चलाया। जब तत्कालीन भाजपा सरकार ने अपना अंतिम बजट पेश किया तो इसके स्थान पर राज्य स्तरीय क्रीड़ा एकेडमी की घोषणा कर दी।

इनका कहना है....
खेल एकेडमी को लेकर अभी तक कोईगतिविधि शुरू नहीं हुई है। भाजपा के कार्यकाल में कांग्रेस ने मुददा उठाया था कि खेल विश्वविद्यालय ही बनना चाहिए। युवाओं के हित के लिए कांग्रेस सरकार को इसके लिए प्रयास शुरू करने चाहिए।
अर्जुनसिंह, सरपंच कुलोद कलां



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