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मेडिकल रिपोर्ट के लिए नहीं भटकेंगे पीडि़त

प्रतापगढ़ जिला स्थाई लोक अदालत अध्यक्ष राजेन्द्र कुमार शर्मा (जिला एवं सेशन न्यायाधीश) की अध्यक्षता में सदस्य अधिवक्ता अजय कुमार पिछोलिया एवं देवेन्द्र कुमार अहिवासी की आयोजित बैठक में प्रस्तुत विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण निर्देश प्रदान किए गए।
स्थाई लोक अदालत के सदस्य अधिवक्ता अजय कुमार पिछोलिया एवं देवेन्द्र अहिवासी ने बताया कि बैठक में प्रार्थी तेजपालसिंह राठौड़ बनाम मुख्य चिकित्सा अधिकारी वगैरह में सुनवाई हुई।
जिसमें प्रार्थी ने बताया था कि जिला एवं सत्र न्यायालय तथा न्यायालयों अरनोद, पीपलखूंट, छोटीसादड़ी और धरियावद में होने वाली मारपीट एवं लड़ाई-झगड़े की घटनाओं के बाद पीडि़त का उपचार कराने एवं मारपीट एवं घटना में आई चोंटों का चिकित्सकीय परीक्षण करवाना आवश्यक है।
परिवाद में बताया कि पीडि़त व्यक्ति उपचार कराने किसी भी निकटस्थ सरकारी अस्पताल में जाता है। घटना में आई चोटों का चोंट प्रतिवेदन संबंधित चिकित्सा अधिकारी से कराता है। लेकिन उसका चोंट प्रतिवेदन संबंधित चिकित्सा अधिकारी द्वारा यह कहकर इन्कार कर दिया जाता है कि संबंधित थाना क्षेत्र के थानाधिकारी अथवा अनुसंधान अधिकारी से इस बाबत रिपोर्ट लाने पर ही चोंट प्रतिवेदन बनाया जाता है। तथा कई जगह चिकित्सा अधिकारी या मेडिकल ज्यूरिस्ट की अनुपलब्धता बताकर चोंट प्रतिवेदन बनाने से इन्कार कर दिया जाता है।
इस पर स्थायी लोक अदालत ने यह आदेश दिया कि जिले में स्थित कोई भी चिकित्साधिकारी पीडि़त के आग्रह पर चोंट प्रतिवेदन तथा अन्य एक्सरे आदि की कार्यवाहियां करने से इन्कार नहीं करेगा। चाहे पीडित जिले में स्थित किसी भी स्थान का निवासी हो और घटना भी जिले में किसी भी स्थान पर घटित हुई हो। ना ही चोंट प्रतिवेदन बनाने के लिए किसी भी पुलिस अथवा अन्य तहरीर की मांग ही करेगा। इस आदेश की एक-एक प्रति पालना के लिए जिला पुलिस अधीक्षक तथा प्रमुख चिकित्साधिकारी जिला चिकित्सालय प्रतापगढ़ को भेजी गई है।
न्यायालय ने माना- पीडि़तों के अधिकारों का हनन
ऐसे में स्थायी लोक अदालत ने यह माना कि यह स्पष्ट रूप से पीडि़त के अधिकारों के हनन का मामला है।ऐसी स्थिति में पीडि़त को न्याय नहीं मिलने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है।
स्थाई लोक अदालत ने कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि केवल पुलिस तहरीर पर ही चोंट प्रतिवेदन बनाया जाए। पीडित जिस थाना क्षेत्र में निवास करता हो, उससे भिन्न थाना क्षेत्र में स्थित चिकित्साधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पर चोंट प्रतिवेदन नहीं बना सके एवं संबंधित चिकित्साधिकारी चोंट प्रतिवेदन बनाने से इन्कार कर दें। पीडित का स्वयं का यह अधिकार है कि वह स्वयं के आवेदन पर चोंट प्रतिवेदन बनाने के लिए संबंधित मेडिकल ज्यूरिस्ट से निवेदन करेगा तथा उसके अनुपस्थित होने की दशा में उस क्षेत्र का उच्च चिकित्साधिकारी, मुख्य चिकित्साधिकारी एवं प्रमुख चिकित्साधिकारी, लिंक मेडिकल ज्यूरिस्ट बाबत निर्देश जारी करेगा। ताकि कोई भी पीडि़त चोंट प्रतिवेदन बनवाने से अथवा न्याय प्राप्ति से वंचित नहीं हो।



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