राजेन्द्रसिंह देणोक
पाली. करीब चार दशक से प्रदूषण और स्लज डिस्पोजल जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे पाली के कपड़ा उद्योग को उबारने का जिम्मा अब मैंनेजमेंट की पढ़ाई कर चुके युवाओं के अपने हाथों में लिया है। इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट जैसी डिग्रियां हासिल कर चुके युवाओं ने अपने शहर के लिए नया इतिहास रचने की ठानी है। स्मार्ट सोच वाले एेसे एक दर्जन युवाओं और विद्यार्थियों ने ‘इण्डस्ट्रीयल इनोवेशन गु्रप’ बनाया है। अब वे शहर की विभिन्न समस्याओं का तार्किक समाधान तलाशने में जुटेंगे। देश और विदेश की महत्वपूर्ण यूनिवर्सिटी में अध्ययन कर चुके इन युवाओं ने देश प्रेम, मातृभूमि के मोह और माता-पिता की सेवाभाव के कारण अन्य शहरों में मोटी तनख्वाह स्वीकारने की बजाय अपने ही शहर में काम करना शुरू किया। अब वे शहर की एक-एक समस्या पर रिसर्च करेंगे और उसका व्यावहारिक समाधान तलाशेंगे।
आदर्श व्यापारिक शहर का सपना
इंडस्टीयल इनोवेशन ग्रुप ने पाली को आदर्श व्यापारिक शहर बनाने का सपना देखते हुए मुहिम शुरू की है। ग्रुप में कई युवा एेसे हैं जिन्होंने सपनों का शहर बनाने के लिए लाखों का पैकेज छोड़ तक दिया था। सभी सदस्य टेक्सटाइल से जुड़े हुए हैं। अब वे पाली की खोई हुई प्रतिष्ठा पुन: लौटाना चाहते हैं।
इसलिए है जरूरत
कपड़ा उद्योग वर्तमान में सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। प्रदूषण की समस्या का हल नहीं करने के कारण एनजीटी की तलवार कई सालों से लटकी हुई है। ढाई साल से कपड़ा उद्योग का कारोबार सालाना १२ हजार करोड़ से घटकर सात करोड़ तक पहुंच चुका है। इतना ही नहीं, पांच दिन पहले जारी हुए एनजीटी के दिशा-निर्देशों की ठीक से पालना नहीं हुई तो कपड़ा उद्योग के लिए और ज्यादा संकट खड़ा सकता है। एेसे में मैनेजमेंट के विद्यार्थी कपड़ा उद्योग की राह आसान कर सकते हैं।
युवाओं का फोकस
कपड़ा इकाइयों का रासायनिक पानी ट्रीट करने के लिए जेडएलडी के अलावा क्या विकल्प हो सकता है। युवाओं का मानना है कि टेक्सटाइल इंडस्ट्री में जेडएलडी पूर्णतया व्यावहारिक नहीं है। इसलिए विकल्प बेहतर रहेगा।
पानी का रीयूज कैसे किया जा सकता है। इसमें कौन-सी तकनीक उपयुक्त रहेगी और पाली की टेक्सटाइल इंडस्ट्री को इसका लाभ कैसे मिल सकता है।
पाली की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए नई तकनीक की आवश्यकता है। कौन-सी तकनीक यहां के लिए उपयुक्त हो सकती है।
ये हैं अग्रणी
अमित समदडि़या : आइआइटी मुम्बई एवं एमबीएम लंदन
प्रदीप सांड : एमएस एण्ड बीटेक, मिसिगन यूनिवर्सिटी, यूएसए
हरीश माहेश्वरी : सीए
चितरंजन धारीलवा : एमबीएम, लंदन
मयंक केडिया : बीटेक टेक्सटाइल इण्ड.
धर्मेश रातडि़या : बीटेक टेक्सटाइल इण्ड.
श्रेणिक छाजेड़ : बीटेक टेक्सटाइल इण्ड.
राहुल गुप्ता : बीटेक कैमिकल
प्रदीप लसोड़ : आइआइटी मुम्बई
परेश मोदी : बीइइ
अक्षय पोरवाल : बीटेक टेक्सटाइल कैमिस्ट्री
विनय राठी : एमबीए
अर्पित मेहता : बीई
सपनों का शहर बनाएंगे
पाली शहर और कपड़ा उद्योग को युवा सोच और उनके सहयोग की सख्त जरूरत है। इसलिए इण्डस्ट्रीयल इनोवेशन गु्रप बनाया है। यह पाली के कपड़ा उद्योग को नई राह दिखाने में जरूर सफल होगा। युवाओं में अपने शहर के लिए बहुत कुछ करने का जज्बा है।
कमलेश सत्कार, उपाध्यक्ष, सीइटीपी, पाली





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