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तारबंदी के लिए किसानों को मेड़बंदी योजना में मिलेगा अनुदान

पाली। जंगली सुअर, नील गाय व मवेशियों से फसल बचाने के लिए जिले के किसानों को खेत की मेड़बंदी पर तारबंदी कराने पर अनुदान देने के नियमों में कुछ शिथिलता दी गई है। कृषि विभाग ने समूह में होने वाली मेड़बंदी के लिए पांच किसानों और 10 हैक्टेयर भूमि के साथ ही लोहे की एंगल होने की अनिवार्यता को हटा दिया है। अब तीन किसान व पांच हैक्टेयर जमीन होने पर भी तारबंदी करवाकर अनुदान ले सकेंगे। इससे जिले के काफी किसानों को सीधे तौर पर फायदा होगा। इस सम्बन्ध में कृषि आयुक्त सीताराम भाले ने निर्देश जारी किए हैं।

अनुसूचित जनजाति के किसानों को नहीं आ रही रास
कृषि विभाग के अधिकारियों के मुताबिक सामान्य किसान को 29 हजार मीटर का लक्ष्य था। इसके मुकाबले अभी तक 17 हजार मीटर में किसानों की तारबंदी हो गई है। इसी तहर से अनुसूचित जाति के लिए 7 हजार 800 मीटर का लक्ष्य था। इसके मुकाबले में 1547 मीटर में तारबंदी हुई है। अनुसूचित जनजाति के लिए 3067 मीटर का लक्ष्य था। लेकिन अभी तक एक भी किसान के खेत की तारबंदी नहीं हुई है।

ऑनलाइन करना होगा आवेदन
किसानों को इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। वरियता के आधार पर इसका फायदा मिल सकेगा। अब एक किसान को चार सौ मीटर के लिए चालीस हजार रुपए तक बतौर सब्सिडी के रूप में मिल सकेंगे। वहीं तारबंदी की ऊंचाई पांच फीट होनी चाहिए। हर दस फीट पर एक पिलर का निर्माण करना होगा।

पहले यह थी योजना
राष्ट्रीय खाद्य मिशन तहत किसानों के लिए दो साल पहले पशुओं से खेती बचाने के लिए तारबंदी पर सब्सिडी देने देने की शुरुआत की थी। इसमें एक किसान के आवेदन करने पर पात्र पाए जाने पर उसे तारबंदी के लिए सब्सिडी का पैसा मिल जाता था। लेकिन, बाद में पांच किसानों के समूह और 10 हैक्टेयर भूमि के मानदंड तय किए गए। इस कारण समूह बनना मुश्किल हो रहा था। आखिरकार तीन किसान व 5 हैक्टेयर भूमि का नियम निकाला है, जो किसानों को रास आ रहा है।
योजना में बदलाव
कृषि विभाग ने योजना में बदलाव किया है। अब पांच की जगह तीन किसान और 10 हैक्टेयर की बजाए 5 हैक्टेयर जमीन होने पर तारबंदी पर अनुदान मिल सकेगा। इससे किसानों को फायदा होगा।
जितेन्द्रसिंह शक्तावत, उप निदेशक, कृषि विभाग विस्तार पाली



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