जैसलमेर/पोकरण. एक ऐसा गेम जो न केवल किशोर व युवाओं को अपनी तरफ आकर्षित कर रहा है, बल्कि नशे की तरह आदी बनाकर दिमाग पर असर डाल रहा है, जिसका नाम है ‘पबजी’। यदि कोई बच्चा यह गेम खेल रहा है, तो अभिभावकों को सावधान होने की जरुरत है। पाक सीमा से सटे सरहदी पोकरण क्षेत्र में इन दिनों प्रत्येक युवा व किशोर एक गेम की तरफ आकर्षित हो रहे है। जानकारों की मानें तो ऑनलाइन खेले जाने वाले इस पबजी गेम के कई दुष्प्रभाव है, जिनसे किशोर व युवा अनभिज्ञ है। गुजरात में सरकार की ओर से इस गेम पर प्रतिबंध भी लगा दिया गया है, लेकिन प्रदेश में अभी तक इस पर किसी तरह का प्रतिबंध नहीं लगा है। यह गेम आम युवा, किशोर के मोबाइल में देखा जा रहा है।
युवा व किशोर हो रहे ‘पबजी’ के आदी...
पबजी गेम को 2017 में लांच किया गया था। इसकी लोकप्रियता को देखते हुए इसे एंड्रोयड व आइओएस पर भी शुरू किया गया। इसमें कई लोग एक साथ मोबाइल में गेम खेलते है। खेलने वाला युवक टीम के साथ आईलैण्ड पर उतरता है तथा यहां छिपे अन्य खिलाडिय़ों को मारना होता है। जो अंत में जीवित बचता है, वही विजेता होता है।
इन दिनों युवाओं, विशेष रूप से 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इस गेम की लोकप्रियता देखी जा रही है। करीब दो जीबी के इस गेम को युवा चाव से अपने मोबाइल में डाउनलोड कर रहे है। यही नहीं इस गेम में इंटरनेट कनेक्टिविटी की आवश्यकता होने के कारण देर रात तक इसे खेलने में व्यस्त नजर आते है। रात के समय इंटरनेट कनेक्टिविटी सही रहने तथा मोबाइल पर कोई अन्य फोन नहीं आने के कारण युवा अपने मोबाइल में गेम खेलते है तथा जीतने पर खुशी का इजहार भी करते है।
यह है दुष्प्रभाव
-इंटरनेट पर विशेषज्ञों की मानें तो पबजी गेम खेलने वाले बच्चे, किशोर व युवा चिड़चिड़े हो जाते है तथा सभी से अलग रहने की कोशिश करते है।
-मोबाइल के गेम को वे शौक, मनोरंजन के साथ-साथ अपनी स्वयं की जीत-हार जोडक़र देखते है।
-विशेषज्ञों के अनुसार गेम खेलते समय नशा करने वालों के दिमाग में डोपामिन न्यूरोकेमिकल के स्त्राव से स्मरण शक्ति खोने का खतरा बढ जाता है।
पहले ब्ल्यू व्हेल, तो अब पबजी
गौरतलब है कि गत वर्ष दुनियाभर में ब्ल्यू व्हेल नामक गेम ने आतंक मचाया था। जिसमें खेलने वाले युवक अथवा किशोर को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता था। इसको लेकर सरकार की ओर से जनजागरण अभियान चलाया गया तथा गेम को बंद करवाया गया। अब धीरे-धीरे बढ़ रहे इस पबजी गेम को लेकर भी जागरुकता की दरकार है।
सरकार को लगानी चाहिए पाबंदी
पोकरण क्षेत्र के करीब 40 प्रतिशत युवाओं को इस गेम की लत लगी हुई है। इस गेम से बच्चों पर दुष्प्रभाव पड़ते है और उनकी पढ़ाई भी बाधित हो रही है। सरकार को ऐसे किसी भी गेम पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, ताकि बच्चों को इसके दुष्प्रभाव से बचाया जा सके।
संतोष पालीवाल, सामाजिक कार्यकर्ता, पोकरण
स्मार्टफोन से रखें दूर
पोकरण क्षेत्र में इस गेम के प्रति युवाओं का आकर्षण बढ़ता जा रहा है। इस गेम के कई दुष्प्रभाव है, जिससे बच्चों को बचना चाहिए। बच्चों को स्मार्टफोन नहीं देना चाहिए। यदि मोबाइल देने की जरुरत है, तो उसकी नियमित जांच करनी चाहिए कि बच्चा मोबाइल में क्या कर रहा है तथा कौनसा गेम खेल रहा है।
डॉ.अरुणकुमार शर्मा, चिकित्साधिकारी, पोकरण





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