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इंस्पेक्टर के पकड़े जाने पर डर गया था सहीराम मीणा, चुनाव बाद मंगवाया पैसा

भीलवाड़ा। नई अफीम नीति में पात्र माने गए डिफाल्टर किसानों से अवैध वसूली के चक्कर में नारकोटिक्स अधिकारियों ने कइयों के पट्टे गत नवम्बर माह के आखिरी सप्ताह तक अटकाए रखे।

 

मुखियाओं ने ऐसे किसानों से पंद्रह से तीस हजार रुपए तक वसूली कर ली, लेकिन अक्टूबर के पहले सप्ताह में ही कोटा में विभाग के एक इंस्पेक्टर के ट्रेप हो जाने से अतिरिक्त नारकोटिक्स आयुक्त डा. सहीराम मीणा थोड़े दिन चुपचाप बैठ गया।

 

उस समय विधानसभा चुनाव के दौरान सख्ती और वाहनों की चैकिंग के चलते भी पकड़े जाने यह पैसा चुनाव सम्पन्न होने के बाद मंगवाना शुरू किया। यूं हुई वसूली जानकारों का कहना है कि आमतौर पर नारकोटिक्स विभाग अफीम की खेती के लिए पात्र किसानों को सितम्बर तक पट्टे वितरित कर देता है।

 

इस बार नई अफीम नीति गत 29 सितम्बर को जारी हुई। इस नीति के तहत प्रदेश में विभिन्न कारणों से डिफाल्टर रहे चार हजार से ज्यादा किसानों को भी पात्र माना गया, लेकिन विभाग के अधिकारियों इन किसानों से मुखिया व अन्य दलालों के माध्यम से पट्टों के एवज में 15 से 23 हजार रुपए तक लिए। जिन किसानों ने पैसा नहीं दिया, उनका कोई न कोई कारण बताकर पट्टा अटका दिया। अफीम की बुवाई नवम्बर के पहले सप्ताह में हो जाती है, लेकिन कुछ किसानों को नवम्बर के आखिरी सप्ताह में पट्टा दिया गया।

 

इंस्पेक्टर-कम्प्यूटर ऑपरेटर हो गए ट्रैप:
अटरू तहसील के एक किसान नरेन्द्र मीणा के पिता के नाम पट्टा वर्ष 2004 में निरस्त होने के बाद विभाग ने इस बार उसे बहाल कर दिया। गत अक्टूबर में वह पट्टा लेने कोटा के नारकोटिक्स कार्यालय गया तो वहां इंस्पेक्टर विपिन अग्रवाल के कहने पर उनके कम्प्यूटर ऑपरेटर पंकज पांचाल ने पट्टे की एवज में 20 हजार रुपए मांगे।

 

इसकी शिकायत पर एसीबी टीम ने गत 9 अक्टूबर को नारकोटिक्स कार्यालय में इंस्पेक्टर विपिन अग्रवाल और पंकज पांचाल को 15 हजार रुपए रिश्वत लेते पकड़ लिया। बाद में तलाशी में ऑपरेटर के पास से छह किसानों से वसूले गए एक लाख एक हजार से ज्यादा की राशि बरामद हुई थी। ब्यूरो के अधिकारियों के अनुसार नारकोटिक्स इंस्पेक्टर अपने क्षेत्र में आने वाले 1500 किसानों से करीब 3 करोड़ रुपए की वसूली के फिराक में था।

 

सहीराम हो गया सतर्क
जानकारों के अनुसार इंस्पेक्टर के ट्रेप हो जाने के बाद अतिरिक्त आयुक्त डॉ.सहीराम मीणा सर्तक हो गया। उसने कुछ दिनों तक लेन देन बंद कर दिया। पट्टेधारियों से वसूली की जिम्मेदार उसके क्षेत्र के मुखिया को ड्डदे दी गई। चूंकि विधान सभा चुनाव होने के कारण जगह-जगह अवैध पैसा पकड़ में आ रहा था, इसलिए सहीराम ने वसूला गया पैसा मुखिया के पास ही रखने को कहा। चुनाव समाप्त होने के बाद ही यह पैसा सहीराम ने अपने पास मंगवाया।



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