कोटा.
जम्मू-कश्मीर व आसपास के क्षेत्रों में आए दिन हिंसा, झड़प व अन्य आपदाओं की घटनाएं होती हैं। इसके चलते वहां के आवाम को सुरक्षा व शिक्षा का माहौल नहीं मिल पाता है। आपदाओं के चलते अक्सर स्कूल बंद रहते है। शिक्षक नहीं आते है, जो आते है वो भी सही तरीके समय पढ़ाई नहीं कराते है, लेकिन जब कोटा आए तो पता चला कि यहां हिन्दुस्तां बसता है.. यह कहना है कोटा कोचिंग कर रही लद्दाख निवासी छात्रा डोन्सकेट डोलमा का।
छात्रा डोलमा ने बताया कि कोटा में अलग-अलग राज्यों के लोग व विद्यार्थी रहने के बावजूद शांति व सौहार्द का माहौल है। विद्यार्थी सुरक्षित हैं। पढ़ाई भी अच्छी होती है। यहां आकर पढ़ाई में कम्पीटिशिन का अलग ही माहौल देखने को मिलता है। सबसे बड़ी बात यह है कि कोटा में किसी मुसीबत के समय लोग मदद के लिए सबसे आगे आते हैं। इसकी वह कायल है।
डोलमा ने बताया कि लद्दाख में हिमपात की घटनाएं आए दिन होती है। बच्चे स्कूल तक नहीं जा पाते है। शिक्षक भी नहीं आते हैं। दिसम्बर तक उनका कोर्स पूरा नहीं होता है। स्कूली शिक्षा कमजोर है। पिछली दिनों जब स्कॉलरशिप को लेकर टेस्ट दिया तो कोटा में कोचिंग में चयन हुआ। कोटा आए तो पहले तो अजीब सा माहौल दिखाई दिया, लेकिन धीरे-धीरे माहौल में ढलने के बाद लगा कि यहां कितना शांत वातावरण है। खान-पान भी अलग सा है। सब लोग मिलजुल कर रहते है। मदद में हमेशा आगे रहते हैं। कोटा में विभिन्न कोचिंग संस्थानों में करीब तीन सौ कश्मीरी विद्यार्थी अध्ययनरत करते हैं। अलग-अलग प्रांतों के बावजूद सब एकजुट हैं। सब की अलग संस्कृति व धर्म है, लेकिन हर त्योहार व पर्व साथ मनाते है। कोचिंग में पढ़ाई में शिक्षक हमेशा साथ देते है।





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