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शहीद हेमराज अमर रहे ! हाथों में फूल, दिल में दर्द और आंखों में आंसू...


कोटा. जिस ओर हेमराज की पार्थिव देह आ रही थी, फूलों का सैलाब भी उधर ही उमड़ रहा था, फिर जैसे-जैसे शहर की राहों से तिरंगे में लिपटे हेमराज गुजरते गए फूलों का काफिला भी उसी ओर चलता गया। कुदरत को भी देखिए बयार भी उसी ओर चली जिस तरफ हाड़ौती के शहीद हेमराज बढ़ रहे थे। हवाओं के संग राह में बिछे फूल इस तरह से आगे की ओर बढ़ रहे थे, जैसे आज अपनी उस अभिलाषा को पूरी करने वाले हों जो वर्षों पहले मैथिलीशरण गुप्त ने अपनी रचना 'पुष्प की अभिलाषाÓ में व्यक्त की थी।
दिल्ली से शनिवार सुबह रेलवे मार्ग से शहीद हेमराज की पार्थिव देह कोटा लाई गई। सम्मान के साथ यह देह शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी तो अंतिम दर्शन के लिए लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। सड़क के दोनों ओर हजारों लोग शहीद हेमराज की पार्थिव देह के अंतिम दर्शन को जमा थे। हाथों में फूल, दिलों में दर्द और आंखोंं में आंसू के बीच उन्होंने हेमराज की शहादत को नमन किया। श्रद्धा के पुष्प पार्थिव देह को अर्पित किए। अंटाघर से एरोड्राम और डीसीएम रोड तक हजारों लोग सड़कोंं पर दोनों तरफ जमा थे। इनमें विद्यार्थी, युवा, धार्मिक, सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के कार्यकर्ता सभी ने शहीद हेमराज को नमन किया। एरोड्राम सर्किल पर हर तरफ से लोगों का काफिला आ रहा था। वाहनों की कतार दूर तक लगी हुई थी। एरोड्राम सर्किल से डीसीएम रोड की ओर कारवा बढ़ा तो मार्ग में फूल ही फूल नजर आए। ये भी हवा के झोंकों के संग हेमराज का पीछा करते दिखे।

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सड़क पर दूर तक फूलों की पंखुडिय़ा फैली हुई थी.. जैसे गुप्त की रचना ये फूल कह रहे हों 'चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनो में गूंथा जाऊं, चाह नहीं मैं प्रेमी माला में बिंध प्यारी को ललचाऊं, चाह नहीं सम्राटों के शव पर हे हरी डाला जाऊं, चाह नहीं देवों के सिर पर चढूं भाग्य पर इठलाऊं, मुझे तोड़ लेना बनमाली, उस पथ पर देना तुम फेंक, मातृभूमि पर शीश चढ़ाने जिस पथ जावें वीर अनेक।Ó को दोहरा रहे हों



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