चूरू. जिले के सैंकड़ों विद्यार्थी दूरी पर चलकर विद्यालय जाने को मजबूर है लेकिन इनकी समस्या का समाधान सरकार की ओर से नहीं किया जा सका है। उल्टा मिलने वाली साइकिल पर भी बे्रक लगा दिए हैं। जानकारी के अनुसार भाजपा सरकार में दो साल पहले छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को साइकिल देने का वादा किया था। लेकिन ये वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में विद्यार्थी आज भी इस योजना का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में वित्त विभाग ने भी साइकिल के लिए स्वीकृत किया गया बजट सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग से लेने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया है। प्रदेश में कुल सात सौ छात्रावास संचालित है। जिसमें दो सौ अधिक छात्रावास ऐसे हैं जो स्कूलों से दो से तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जबकि चूरू में करीब ११ छात्रावास ऐसे हैं जिनकी दूरी दो से तीन किमी की है। इन छात्रावासों में कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थी रहते हैं। इनको स्कूल जाने में किसी प्रकार की परेशानी ना हो इसके लिए पूर्ववर्ती सरकार ने यह सुविधा प्रदान कर साइकिल देेने की घोषणा की थी। लेकिन आज तक विद्यार्थियों को साइकिल नहीं मिल पाई है। गौरतलब है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ने साल २०१७-१८ के बजट में इसकी घोषणा भी की थी। लेकिन इस घोषणा पर कोई अमल नहीं किया जा सका है।
विभाग ने नहीं किया बजट का इस्तेमाल
राज्य सरकार के निर्देश पर वित्त विभाग ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को करीब दो साल पहले साइकिल के लिए बजट आवंटित किया था। लेकिन निदेशालय स्तर पर देरी होने के कारण साइकिल क्रय नहीं की जा सकी थी। इसके लिए प्रदेश के समस्त जिलों से साइकिलों के प्रस्ताव भी मंगवाए गए थे।
दो साल में किए तीन टैण्डर
सूत्रों के मुताबिक साइकिल क्रय करने के लिए विभाग ने दो साल में करीब तीन टैण्डर जारी किए थे। इसके लिए सैम्पल भी मंगवाए गए लेकिन इसके बावजूद खरीद नहीं हो पाई है।
अब सरकार करेगी रिव्यू
अब तक साइकिल खरीद नहीं होने के मामले को वर्तमान सरकार रिव्यू करेगी। इसके अलावा वित्त विभाग ने भी रिव्यू की जरूरत महसूस की है। यही नहीं वित्त विभाग ने साइकिल के लिए आवंटित किए गया बजट भी वापस लौटाने के निर्देश दिए हैं। इससे साफ हो गया है कि अब इन विद्यार्थियों को साइकिल मिलना मुश्किल है।
इनका कहना है
&साइकिल के लिए प्रस्ताव मांगे गए थे। वो निदेशालय भिजवा दिए थे। जिले में करीब ११ छात्रावास ऐसे हैं जो स्कूलों से दो किमी की दूरी पर है। मामला निदेशालय स्तर पर ही लंबित है। जैसे ही मार्गदर्शन मिलेंगे साइकिल का वितरण किया जाएगा।
नरेश बारोठिया, सहायक निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग चूरू





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