सवाईमाधोपुर। पांच फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर आंदोलन दूसरे दिन शाम करीब 5 बजे सरकार के एक सदस्यीय प्रतिनिमंडल धरना स्थल पहुंचा। इस दौरान गुर्जरों से वार्ता के लिए पहुंचे विश्वेंद्र सिंह और आईएस नीरज के पवन ने गुर्जरों को रविवार सुबह वार्ता के लिए जयपुर बुलाया लेकिन गुर्जरों ने इसे ठुकराया दिया। विश्वेन्द्र सिंह ने बैंसला से वार्ता के लिए दस सदस्य कमेटी बनाने को कहा।
इस पर बैंसला ने इनकार कर दिया। बैंसला ने कहा कि 14 साल से कमेटियां ही बनती आ रही है। जो भी बात होगी अब यहीं रेलवे ट्रैक पर ही होगी। बैंसला ने कहा के सरकार जब दस दिन में सवर्ण आरक्षण ला सकती है तो गुर्जर आरक्षण क्यों नहीं। नीरज के पवन ने कहा कि सरकार 5 फीसदी आरक्षण की दिशा में काम कर रही है।
इससे पहले बैंसला ने कहा था कि अब सरकार से वार्ता एक पक्षीय ही होगी। अब कोई दो पक्षीय वार्ता नहीं होगी। साथ ही बैंसला ने ये भी कहा कि वार्ता में पहली और आखिर मांग सिर्फ गुर्जर आरक्षण ही होगी।
बैंसला ने कहा कि मैं तेरह साल से संघर्ष कर रहा हूं, मुझे आरक्षण चाहिए और आरक्षण लेकर ही रहूंगा। उन्होंने कहा कि मैं न तो सुप्रीम कोर्ट को जानता हूं और नहीं हाई कोर्ट को। मुझे तो सिर्फ आरक्षण चाहिए।
उधर, गुर्जर आंदोलन की मांगों पर मुख्यमंत्री गहलोत का कहना है कि पिछली बार भी उनकी अधिकतर मांगे राज्य सरकार द्वारा मानी गई थी। वह इस बार भी उनसे बातचीत करने के लिए तीन मंत्रियों की कमेटी बना दी गई है। इस बार जो उनकी मांगे हैं उनका ताल्लुक केंद्र सरकार से है।
सीएम गहलोत का कहना है कि पिछली बार 5% आरक्षण की मांग को विधानसभा में पारित कर लागू करने का प्रयास किया था। लेकिन हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी। अब जो गुर्जर समाज की मांग है वह संविधान संशोधन करके ही पूरी हो सकती है यह बात बैसला जी को भी मालूम है। इसलिए उनका आंदोलन करना समझ से परे है। उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन प्रधानमंत्री और गृहमंत्री भारत सरकार को देना चाहिये। कानून व्यवस्था खराब करना उचित नहीं है।





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