चूरू. पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से इनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की जा रही है। ऐस ेमें ये पॉलीथिन जहां पशुओं के लिए खतरनाक साबित होती जा रही हे। वहीं मानव शरीर पर भी इसका असर बढ़ता ही जा रहा है। लेकिन प्रशासनिक अधिकारी जानकर अनजान बने बैठे हैं। जानकारी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पॉलीथिन की थैलियों पर प्रतिबंध लगाया गया था। कुछ समय के लिए तो दुकानों और बाजारों में इसका उपयोग किया गया। लेकिन समय बीतने के साथ ही इसका चलन फिर से बढ़ गया है। ऐसे में ये थैलियां बीमारियां बांट रही है। विशेष कैमिकल से तैयार की जाने वाली ये प्लास्टिक जहर से भी अधिक खतरनाक है।
टारगेट पूरा करने के लिए करते कार्रवाई
जानकारी के अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले टारगेट को ही आधार मानकर कार्रवाई करते हैं। इसके बाद वे भूल जाते हैं। जिले में हर जगह इसका खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। लेकिन प्रशासन मौन है। स्वास्थ्य पर इसका विपरीत असर पड़ रहा है।
बड़ी फर्मों पर करें कार्रवाई
सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि वे तो छोटे विक्रेता हैं। प्लास्टिक की थैलियां बनाने वाली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। ताकि इस पर पूर्णरूप से प्रतिबंध लग सके। अधिकारियों की ओर से केवल छोटे दुकानदारों को परेशान किया जाता है। ऐसा नहीं होना चाहिए।
नगरपरिषद मौन
चूरू व सुजानगढ़ में नगरपरिषद प्रशासन को लगातार कार्रवाई की जानी चाहिए थी लेकिन यहां के अधिकारी भी प्लास्टिक की थैलियों को लेकर मौन धारण किए हुए हैं। साफ हो रहा है कि वे कार्रवाई में रूची नहीं दिखा रहे





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