उदयपुर/ झाड़ोल. सरकारी दावों के बावजूद क्षेत्र में स्वच्छता अभियान की मखौल उड़ रही है। स्थानीय प्रशासन की अनदेखी से रोडवेज बस स्टैण्ड स्थित महिला व पुरुष मूत्रालय नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि शौचालय सुविधा के नाम यहां गंदगी का अंबार लगा हुआ है। व्यवस्था को लेकर कोई धणी-धोरी नहीं है। मजबूरी में बाहर से आने वाले पर्यटक एवं आमजन लघुशंका निवारण के लिए दीवार के सहारे या फिर अन्य जगहों पर गंदगी करने के लिए मजबूर हैं। चाहकर भी लोग शौचालयों का उपयोग नहीं कर पा रहे।
आमलोगों को अनिवार्य सुविधाओं के लिए भटकने का ये मामला और कहीं का नहीं बल्कि मुख्यालय का है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों का आना-जाना लगा रहता है। गंदगी से अटे शौचालयों को लेकर ऐसा भी नहीं कि किसी स्तर पर जानकारी नहीं हो, लेकिन सच्चाई के बावजूद इस पर अमल करने की क्षमता किसी स्तर पर नहीं दिखाई जा रही है। कमोबेश हाल ही में निर्मित कॉम्पलेक्स के नए शौचालय का भी आलम है। वहीं भी सुविधा के नाम पर आम लोगों से मजाक हो रहा है। अटी गंदगी से समीपवर्ती दुकानदारों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकुल प्रभाव पड़ रहा है। ब्लॉक हुए शौचालयों के कारण गंदगी भीतर ही भर रही है। दुर्गंध में लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। ऐसी स्थिति तब है जब मुख्यालय पर प्रशासनिक अमले के स्तर स्वच्छता के नाम पर हजारों रुपए मासिक खर्च हो रहे हैं। कहे तो दिखाई साफ सफाई से ज्यादा यहां कुछ नहीं हो रहा। हकीकत यह भी है कि समस्या को लेकर किसी भी स्तर पर उच्चाधिकारी बोलने को तैयार नहीं है।





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