दिनेश शर्मा
गिरादड़ा. जिला मुख्यालय से सटा छोटा सा गांव गिरादड़ा। जहां के बाशिंदों को चुनाव से कुछ समय पहले ही सालों से धूल उड़ाते गांव के कच्चे मार्ग को गौरव पथ में तब्दील करने का सपना दिखाया गया। उनकी खुशी तो तब दुगुनी हो गई, जब यहां काम शुरू करने के लिए ठेकेदार ने कंकरीट भी डलवा दी। लेकिन, ग्रामीणों की ये खुशी तब काफूर हो गई, जब ठेकेदार ने एक ट्रैक्टर ट्रॉली कंकरीट डलवाने के बाद इस गांव का रुख ही नहीं किया। लोगों ने विधानसभा चुनाव में वोट भी डाल दिए और नई सरकार भी चुन ली गई। लेकिन, यहां के लोगों की पीड़ा पर मरहम लगाने किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने यहां का रुख नहीं किया। आज भी धूल ही उड़ती रहती है। दरअसल, ये गांव जहां सुमेरपुर विधानसभा क्षेत्र में आता है तो पंचायत समिति पाली लगती है। सुमेरपुर के पूर्व विधायक मदन राठौड़ ने चुनाव से पहले गौरव पथ बनाने की घोषणा की और कार्य स्वीकृत करवाया। कुछ समय बाद इसका टेंडर भी हो गया। करीब तीन माह पहले ठेकेदार ने गौरव पथ बनाए जाने वाले मार्ग पर कंकरीट भी डलवा दी। हालांकि, कंकरीट एक ट्रैक्टर ट्रॉली ही डलवाई गई। इसके बाद से ठेकेदार ने इस मार्ग का रुख ही नहीं किया। इतना ही नहीं, जिम्मेदार अधिकारी भी इस गौरव पथ को शुरू कराने में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं।
पंचायत समिति में भी उठाया मुद्दा
एेसा नहीं है कि जिम्मेदार जनप्रतिनिधि या विभागीय अधिकारी इस मामले से अनजान है। यहां के सरपंच पंचायत समिति की आम सभा में गौरव पथ का मुद्दा उठा भी चुके हैं। लेकिन, सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बजट नहीं होने का हवाला देकर हाथ झटक दिए।
दूसरे काम पूरे होंगे तब करवाएंगे शुरू
अभी कार्य दूसरी जगहों पर चल रहे हैं। वहां के कार्य पूर्ण होने पर जल्दी ही गौरव पथ का कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
उर्मिला चौधरी, जेइएएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग, पाली
ऊबड़-खाबड़ मार्ग
यह मार्ग ऊबड़-खाबड़ है। इस पर वाहन चलाना भी मुश्किल हो रहा है। बारिश के दिनों में तो पैदल निकलना भी दुश्वार हो जाता है।
गणाराम देवासी, ग्रामीण
ठेकेदार नहीं लौटा
ठेकेदार ने गौरव पथ का कार्य शुरू करने के लिए ट्रोली भर कंकरीट डाली थी। फिर यहां आया ही नहीं। कोई भी अधिकारी ने भी यहां देखने की कोशिश नहीं की है कि यहां कार्य शुरू है या बंद।
कुदंनसिंह रजपूत, ग्रामीण
पंचायत समिति में भी उठाया था मुद्दा
मैंने पंचायत समिति की आम सभा में गिरादड़ा के गौरव पथ का मुद्दा उठाया तो सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने बजट नहीं होने का बहाना बना दिया। यहां की जनता परेशान हो रही है।
दीपाराम मकवाना, सरपंच, ग्राम पंचायत गिरादड़ा





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