जयपुर।
भाजपा ने इस बार लोकसभा (Lok Sabha Election 2019) में सभी 25 सीटों को जीतने का टारगेट ले तो लिया, लेकिन प्रदेश की इन 25 में से दस लोकसभा सीटों पर सांसद-विधायकों में इतना विवाद है कि पार्टी नेता सुलझा ही नहीं पा रहे हैं और इस चक्कर में कार्यकर्ता भी बंटे हुए नजर आ रहे हैं। सांसद-विधायकों का यह झगड़ा यों तो प्रदेश में सभी क्षेत्रों में है, लेकिन ज्यादा झगड़ा पश्चिमी, मध्य राजस्थान की सीटों पर है। यहां तक कि जयपुर शहर में भी विधायक और सांसदों के बीच अंदरूनी नाराजगी साफ दिख रही है। पिछले दिनों जब भाजपा ने रायशुमारी करवाई थी तो चार विधायकों ने और दो पूर्व विधायकों ने खुले तौर पर सांसद के विरूद्ध नाराजगी जताई थी और कह दिया था कि जयपुर शहर लोकसभा सीट जीतनी है तो प्रत्याशी बदल देना चाहिए। बीकानेर लोकसभा सांसद और केन्द्र में मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और देवी सिंह भाटी का झगड़ा तो जगजाहिर ही है। इसी तरह आठ अन्य लोकसभा सीटों पर भी किसी ना किसी तरह का विवाद है, जिससे पार्टी नेता एकजुट नहीं है और इसका नुकसान कार्यकर्ताओं के बंटवारे के रूप में उठाना पड़ रहा है।
विवाद की रिपोर्ट दिल्ली तक
भाजपा ने सांसद-विधायक और स्थानीय नेताओं के विवाद की रिपोर्ट तैयार करवाकर दिल्ली आलाकमान को भी भेजी है। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट के बाद वर्तमान स्थिति को लेकर आकलन किया जा रहा है।
प्रदेश में इन सीटों पर ज्यादा विवाद
भाजपा में नागौर, चूरू, बाड़मेर-जैसलमेर, टोंक, जयपुर शहर, बीकानेर, धौलपुर-भरतपुर, राजसमंद, चित्तौडगढ़, सीकर, झुंझुनूं में सांसद-विधायक और स्थानीय नेताओं में विवाद गहराया हुआ है और पिछले दिनों प्रदेश में भाजपा ने जो रायशुमारी की थी। उसमें यह विवाद सामने भी आ गए थे।





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