गंगापुरसिटी . प्रदेश की राजधानी स्वाइन फ्लू के खौफ से कांप रही है। कई जिंदगियां लील चुका फ्लू यहां भी लोगों के डर का कारण बना हुआ है। हालांकि जिले में अभी तक स्वाइन फ्लू का रोगी नहीं मिला है, लेकिन चिकित्सा विभाग के पास इससे लडऩे को हथियार अधूरे ही नजर आ रहे हैं। राजकीय चिकित्सालय में महज नमूने लेने की सुविधा है। वहीं इलाज के नाम पर टेमीफ्लू दवा का ही सहारा है।
जयपुर में कहर बरपा चुके स्वाइन फ्लू को लेकर अस्पताल प्रशासन सतर्क नजर आ रहा है। ऐसे में यहां आइसोलेशन वार्ड बनाकर इसके लिए प्रभारी चिकित्सक भी लगा दिए हैं, लेकिन जांच की सुविधा के नाम पर मरीज में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण नजर आने पर केवल नमूने लेने की सुविधा है। इस नमूने की जांच की सुविधा जयपुर में ही है। हालांकि यह ‘खौफ’ अभी तक शहर में नहीं पहुंचा है। अस्पताल में एक भी संभावित मरीज अब तक नहीं आया है, लेकिन अस्पताल प्रशासन इसको लेकर सतर्कता बरतता नजर आ रहा है। वहीं उपचार की बात की जाए तो अस्पताल प्रशासन का पर्याप्त दवा होने का दावा है, लेकिन पूरे उपचार के नाम पर स्वाइन फ्लू रोग से बचाने के लिए टेमीफ्लू दवा ही उपलब्ध है।
दूर की राम-राम ही चोखी
यूं तो स्वाइन फ्लू जैसी जानलेवा बीमारी से बचने के लिए बिना डरे तुरंत चिकित्सक से इलाज कराना चाहिए, लेकिन इससे बचाव के लिए भारतीय परंपरा काफी हद तक मुफीद साबित हो सकती है। स्वाइन फ्लू के मरीज से बीमारी हमारे पास नहीं आए। इसके लिए दूर की ‘राम-राम’ बनाए रखें। चिकित्सकों का मानना है कि स्वाइन फ्लू का कीटाणु इसके रोगी के संपर्क में आने से हो सकता है। हाथ-मिलाने, गले मिलने सहित उसके संपर्क में आने पर स्वाइन फ्लू होने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में इससे बचाव के लिए हाय-हैलो की पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण नहीं करते हुए हाथ मिलाने के बजाय हाथ जोडक़र राम-राम या नमस्ते की जाए तो इस रोग का एक से दूसरे व्यक्ति में जाने का खतरा काफी हद तक कम हो सकता है।
इस मामले में पीएमओ डॉ. जी.बी. सिंह का कहना है कि हमें जरा भी शक होता है तो हम यहीं मरीज का उपचार शुरू कर देते हैं। नमूना वीटीएम (वेक्टर ट्रांसपोर्ट मीडिया) के जरिए भेजा जाता है। इसके बाद सी कैटेगिरी का नमूना जांच के लिए भेजते हैं। रिपोर्ट का इंतजार नहीं करते हुए हम मरीज को पूरा उपचार देते हैं। इसके लिए हमारे पास दवा है, लेकिन वेंटीलेटर एवं आईसीयू के अभाव में गंभीर मरीज को रैफर करना पड़ता है।
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. बिजेन्द्र गुप्ता का कहना है कि स्वाइन फ्लू के मरीज के संपर्क में आने से इस रोग के होने का खतरा बना रहता है। एहतियात के तौर पर मरीज से दूर रहना चाहिए। हाथ मिलाने की बजाय हाथ जोडक़र नमस्ते की जाए तो संपर्क में आने से बचा जा सकता है।
यह हैं लक्षण
- लगातार खांसी
- गले में खराश
- छींक व नाक से पानी बहना।
- बुखार, सिरदर्द व सांस लेने में कठिनाई।
- उल्टी व दस्त का होना।





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