लवाण. प्रहलादपुरा गांव में दो सगी बहनें सरकारी लाभ व सहायता के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। माता-पिता की बचपन में मौत हो जाने के बाद अब जीने का कोई सहारा नहीं है। चार बहिनें व एक भाई हैं। इसमें दो बहिनों की तो शादी हो गई, लेकिन अब सीमा मीणा व भेतेरी व दीपक ही बचे हैं।
माता-पिता की बीमारी से मौत होने के बाद परिवार में पालने वाला कोई नहीं है। फिलहाल उनके ताऊजी गोपीराम ही पालन-पोषण कर रहे हैं। सीमा मीणा कॉलेज में पढ़ती है व भाई किसी रिश्तेदार के घर रहकर पढ़ाई कर रहा है। छोटी भतेरी राजकीय सीनियर उच्च माध्यमिक विद्यालय सोनड़ में 12 वीें कक्षा में पढ़ाई करती है।
रोने पर चला पता
जब विद्यालय में किसी काम के लिए कहा तो भतेरी रोने लग गई। अध्यपकों ने पूछा तो पता चला कि इसके माता-पिता ही नहीं है तो पढाई के लिए सामग्री कहां से लाएगी। प्रधानाचार्य गगांराम मीणा, हेमराज सैनी, कालूराम मीणा, कल्याण महावर, कुसुम सैकड़ा, भगवानसहाय प्रजापत, बदराम मीणा और प्रहलाद फाटक्या ने दोनो बहनों को ग्यारह हजार रुपए की सहायता दी व व्याख्याता अर्चना जैन ने 31 सौ रुपए का योगदान दिया। यह राशि दोनों बहनों के खातों में जमा कराई गई।
बकरी चराते समय ही करती हंै पढ़ाई
छोटी बहन तीन बकरियां चराने जंगल में जाती है और वही 12 वीें परीक्षा की तैयारी भी करती है। गैस सिलेण्डर के नहीं होने से जंगलो से ही लकड़ी लेकर आती है। पाठ्य सामग्री पर्याप्त नहीं होने से वह विद्यालय की अन्य छात्राओं से कापी में लिखकर लाती है और उसी से ही याद करती है।
सरकारी योजना से वंचित, रहने के लिए मकान नहीं
दोनों सगी बहनों के लिए रहने के लिए पक्का मकान भी नहीं है। कच्ची झोपड़ी बना रखी है। उसी में रात गुजारती है। उसी झोपड़ी में ही बकरियों को बांधती है और दूध बेचकर कुछ सामान खरीदती है। जब कोई त्योहार आता है तो वे रोने लग जाती है।ग्राम पंचायत ने बीपीएल का राशन कार्ड भी नहीं बनाया है। इंदिरा आवास के नहीं होने से कच्चे मकान में ही रहने को मजबूर हो रही है। सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना मां बाड़ी,पालनहार और नवीं कक्षा की छात्रवृत्ति भी नहीं मिली है।
बहनें देती हंै पांच सौ रुपए महिना
दोनों बडी बहनें दोनों छोटी बहनों को पांच सौ रुपए महिना देती है। जिससे कपड़े व कुछ खाने की सामग्री लेकर आती है।मात्र दो बीघा जमीन है। कई वर्षों से कुएं में पानी नही होने से वह भूमि भी बंजर हो रही है। ताउजी गोपीराम मीणा ने बताया कि परिवार बड़ा है। कमाने की शक्ति नहीं है। सबसे ज्यादा चिंता दोनों बहनों की शादी की हो रही है। दोनों बहनो को देखकर अश्रु बह निकलते हैं। सरकार भी कुछ सहायता नहीं दे रही है। वह भी दिनभर चारपाई पर ही लेटा रहता है।
सरपंच बस बाई मीणा ने बताया कि ग्राम पंचायत से जो सहायता होगी, वह दी जाएगी। प्रधानमंत्री आवास का प्रस्ताव बनाकर आगे भेजा जाएगा। दोनों बहनों व इनके भाई का बीपीएल राशन कार्ड भी तुरन्त बना देंगे।





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