फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर आदर्श स्कूल के विद्यार्थी!
गुड़ामालानी . सरकार एक ओर जहां विभिन्न योजनाएं में करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है। वहीं ग्राम पंचायत छोटू के राआउमा विद्यालय में बच्चों को अच्छा पानी भी नसीब नहीं हो रहा। यहां अध्ययनरत 450 विद्यार्थियों को फ्लोराइड युक्त पानी पीना पड़ रहा है। ऐसे में उन्हें हड्डियों सहित अन्य बीमारियों की चिंता सता रही है।
सन 1964 से स्थापित विद्यालय को जलदाय विभाग ने 2016 में कनेक्शन तो जारी कर दिया, लेकिन इसमें आ रहा पानी इतना खारा है कि पीना भी मुश्किल है। फ्लोराइड युक्त पानी पीने से विद्यार्थियों में फ्लरोसिस व पेट संबंधी बीमारियों की आशंका है। फ्लोराइडयुक्त पानी पीने से छात्रों के सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है। छात्रों को फ्लोराइडयुक्त पानी से दांत खराब हो रहे है। इसके अलावा छात्रों को पेट सम्बन्धी रोग होने की आशंका सता रही है।
बारिश के अभाव में सूखे गए टांके
विद्यालय में मीठा पेयजल संग्रहण के लिए परिसर में चार टांके तो बने हैं, लेकिन इस वर्ष पर्याप्त बारिश नहीं होने से ये सूखे पड़े हैं। इसके चलते विद्यार्थियों को मजबूरन फ्लोराइड युक्त खारा पानी पीना पड़ रहा है साथ ही खारे पानी से पोषाहार भी पकाना पड़ रहा है। सरकारी स्कूलों में बच्चों के बेहतर पोषण के लिए सरकार ने मिड डे मील के बाद कुछ महीनों पहले दूध वितरण योजना तो शुरू कर दी है, लेकिन इधर स्कूल में बच्चों के पीने के लिए मीठा पानी तक उपलब्ध नहीं है।
दानदाताओं के भरोसे विद्यालय में पानी
विद्यालय को आदर्श स्कूल का दर्जा तो है, लेकिन मीठा पानी कोसों दूर है। विद्यालय को पेयजल के लिए दानदाताओं के सहयोग से टैंकर मंगवाने पड़ते हैं। कई बार समय पर टैंकर नहीं पहुंचने की स्थिति में विद्यार्थियों को घर से पानी लाना पड़ता है या खारे पानी से ही काम चलाना पड़ता है। विद्यार्थी पुष्पेंद्र पंवार व लक्ष्मण का कहना है कि कई बार खारे पानी से पेट दर्द की समस्या हो जाती है।
जल की समस्या गंभीर
&स्कूल में पेयजल की गंभीर समस्या है। इस वर्ष बारिश की कमी के चलते भूमिगत टांके सूखे हैं। खारे पानी की आपूर्ति होने से हालात इतने खराब हैं कि पेयजल के लिए दानदाताओं का सहयोग लेना पड़ रहा हैं।
- भोमाराम चौधरी, प्रधानाचार्य छोटू





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