अजय शर्मा, सीकर.
प्रदेश के सरकारी स्कूल व कॉलेजों में कम्प्यूटर शिक्षा मजाक बन गई है। नैनिहालों को कम्प्यूटर शिक्षा के दम पर हाईटेक बनाने का दंभ भरने वाली सरकारे 13 वर्षो में स्थायी शिक्षक की नियुक्त तक नहीं कर सकी। ऐसे में प्रदेश की दो हजार से अधिक सरकारी स्कूल व कॉलेजों की कम्प्यूटर लैब पर ताले लटके हुए है। कम्प्यूटर विषय अनिवार्य होने के कारण कोई ऐसे गंभीरता से नहीं ले रहा है। इसका कारण कम्प्यूटर विषय में भविष्य बनाने वाले युवाओं की नींव खोखली हो रही है। पिछली भाजपा सरकार के वर्ष 2014 में कम्प्यटर शिक्षकों को हटाने के बाद प्रदेशभर में समस्या और बढ़ गई। प्रदेश के शिक्षामंत्री का दावा है कि कम्प्यूटर शिक्षा की समीक्षा के बाद कोई उचित फैसला लिया जाएगा।
लाखों की लैब पर लापरवाही का ताला
प्रदेश में युवाओं को कम्प्यूटर शिक्षा देने के लिए सरकार ने लाखों रुपयों का बजट खर्च कर दिया। लेकिन शिक्षक सहित अन्य संसाधन नहीं होने के कारण कम्प्यूटर लैब पर लापरवाही का धूल छाया हुआ है। प्रदेश की ज्यादातर स्कूल व कॉलेजों की कम्प्यूटर लैबों पर ताला लटका हुआ रहता है। ऐसे में विद्यार्थी खुद अपने स्तर पर पढऩे को मजबूर है।
राज्य में कंप्यूटर शिक्षा: 2500 स्कूलों में 2008 में शुरू
प्रदेश में कंप्यूटर शिक्षा अलग-अलग चरणों में शुरू हुई। पहले चरण में प्रदेश की 2500 स्कूलों में जुलाई 2008 में व द्वितीय चरण में 2000 स्कूलों में जुलाई 2009 से आईसीटी परियोजना के तहत कम्प्यूटर शिक्षा की शुरूआत हुई। इस योजना के तहत प्रत्येक स्कूल में एक कंप्यूटर शिक्षक लगाया गया। अप्रैल 2014 में यह परियोजना पूरी होने के बाद सभी 4500 स्कूलों से कंप्यूटर शिक्षक हटा दिए गए। तभी से कम्प्यूटर प्रयोगशालाओं के ताला लटका हुआ है। तीसरा चरण फरवरी 2014 में 2000 स्कूलों में आईसीटी परियोजना में कंप्यूटर शिक्षा शुरू हुई। इसमें पांच विद्यालयों पर एक कंप्यूटर शिक्षक लगाया गया यह परियोजना फरवरी 2019 में पूरी होगी। चौथे चरण में 525 स्कूलों व पांचवे चरण में 303 स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा शुरू होगी।
योजना ने भी तोड़ा दम
बदलते दौर में विद्यार्थियों को आईटी में दक्ष बनाने के लिए सरकार ने क्लिक योजना शुरू की। इसके तहत छात्रों से फीस लेकर विद्यालय के नजदीक के आरकेसीएल सेंटर से अनुबंध कर बच्चों को कंप्यूटर शिक्षा उपलब्ध करानी थी। लेकिन सरकारी स्कूलों में कम्प्यूटर शिक्षा के नाम पर फीस वसूली नहीं होने के कारण क्लिक योजना ने भी दम तोड़ दिया। जनवरी 2018 में राज्य सरकार ने अपने स्टेट बजट से 1172 स्कूलों में लैब स्थापित कराई।
नौवीं और दसवीं में अनिवार्य
प्रदेश में कक्षा नवीं में कंप्यूटर विषय का अद्र्धवार्षिक व वार्षिक परीक्षाओं में परीक्षा होती, इसमें पास होना अनिवार्य होता है। लेकिन ज्यादातर के प्रायोगिक परीक्षाओं में काफी अधिक अंक भेजे जाते है। इसी के सहारे भी बोर्ड की परीक्षा पास कर लेते है। बोर्ड कम्प्यूटर की फाउण्डेशन और इन्फोरमेशन टेक्नोलॉजी के नाम से परीक्षा लेता है।
भाजपा ने कम्प्यूटर शिक्षा का ढांचा पूरी तरह बिगाड़ दिया था। इसकी समीक्षा कराई जा रही है। प्रदेश के युवाओं को हर हाल में कम्प्यूटर शिक्षा दिलाई जाएगी। स्कूलों में बंद पड़ी लैबों को शुरू कराने के लिए भी कोई नीति बनाई जाएगी। -गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्य मंत्री
सूचना प्रौद्योगिकी के युग में सरकार प्रदेश के नैनिहालों को कम्प्यूटर शिक्षा से दूर कर रही है। पिछली भाजपा सरकार ने वर्ष 2014 में कम्प्यूटर शिक्षकों को हटा दिया था। प्रदेश की कांग्रेस सरकार को खराब दौर से गुजर रही कम्प्यूटर शिक्षा की दिशा में कोई बड़ा कदम उठाना चाहिए। -महेंद्र कुमार श्रोत्रिय, प्रदेश अध्यक्ष,





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