सवाईमाधोपुर. रणथम्भौर में लगातार बढ़ रहा बाघ-बाघिनों का कुनबा जहां वन्यजीव संरक्षण की सफलता की कहानी कह रहा है। वहीं दूसरी ओर बाघों की संख्या में लगातार हो रही वृद्धि से आपसी संघर्ष की आशंका बढ़ती जा रही है। रणथम्भौर में वर्तमान में चार बाघिनों व दो शावकों को टेरेटरी की तलाश है। ऐसे में टेरीटरी के लिए भविष्य में भी बाघ-बाघिनों के बीच संघर्ष हो सकता है।
इन को तलाश
रणथम्भौर में वर्तमान में टी-99, टी-102, टी-105 व टी-107 को अपनी नई टेरेटरी की तलाश है। रणथम्भौर में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण बाघ-बाघिन टेरेटरी की तलाश में बहार निकल रहे हैं। ऐसे में पहले की तुलना में इस साल रणथम्भौर के बहारी जोनों में बाघ-बाघिनों की साइटिंग अधिक हो रही है।
श्िफ्टिंग के लिए किया था चिह्नित
ऐसा नहीं है कि विभागीय अधिकारी इस बात से बेखबर हैं। विभाग को भी बाघ बाघिनों के बीच संघर्ष की आशंका का अनुमान है। विभाग ने गत वर्ष रणथम्भौर से कोटा के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व भेजे जाने वाली बाघिनों की शिफ्टिंग में टी-102, टी-107 व टी-106 को सूची में शामिल किया था। इनमें से विभाग ने टी-106 को मुकुंदरा भेज दिया है। विभाग की ओर से एक बाघिन को अभी ओर मुकुंदरा भेजा जाना है, लेकिन गत दिनों मुकुंदरा में बाघ के साथ मैटिंग के दौरान बाघिन के घायल होने के कारण फिलहाल शिफ्टिंग को टाला जा सकता है। निकट भविष्य में शिफ्टिंग की जा सकती है।
दो शावक भी कर रहे टेरेटरी की तलाश
रणथम्भौर के जोन छह में बाघिन लाडली(टी-8) अपने दो शावकों के साथ लम्बे समय से विचरण कर रही है। शावक भी अब करीब डेढ़ से दो साल के हो गए हैं। ऐसे में अब शावकों ने भी अपने लिए टेरेटरी की तलाश शुरू कर दी है।
मां से ही मिल रही चुनौती
रणथम्भौर में इस समय हाल ही में जवान हुई बाघिनों को टेरेटरी को लेकर सबसे अधिक चुनौती अपनी मां से ही मिल रही है। टी-99 इस समय सवाई मानसिंह अभयारण्य में विचरण कर रही है। करीब साढ़े तीन साल की इस बाघिन को अपनी मां टी-60 से ही टेरेटरी को लेकर चुनौती मिल रही है। इसी क्षेत्र में बाघिन टी-13 भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुकी है। टी-102 को भी कचीदा वन क्षेत्र में अपनी मां से खतरा मण्डरा रहा है। वहीं दूसरी ओर बाघिन टी-41 से भी इसके संघर्ष की आशंका बनी हुई है। इसी प्रकार टी-105 व टी-107 को भी लम्बे समय से टेरेटरी की तलाश है।
रणथम्भौर में बाघों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बाघ बाघिन टेरेटरी की तलाश कर रहे हैं। वहीं बाघों की तुलना में बाघिनों की संख्या कम होने के कारण भी संघर्ष की आशंका रहती है।
मनोज पाराशर, सीसीएफ, रणथम्भौर बाघ परियोजना, सवाईमाधोपुर।





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