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मैदान में दौड़े वनकर्मी, खेलों का दिखाया कौशल

करौली. वन विभाग (उप वन संरक्षक) की ओर से गुरुवार से यहां माथुर स्टेडियम में दो दिवसीय जिला स्तरीय वन विभाग खेलकूद प्रतियोगिता शुरू हुई। प्रतियोगिता का उद्घाटन जिला कलक्टर नन्नूमल पहाडिय़ा ने किया।
इस मौके पर कलक्टर ने कहा कि खेलों से शरीर स्वस्थ्य रहने के साथ मानसिक ताजगी रहती है। जो कार्मिक शारीरिक व्यायाम नहीं करते हैं और मानसिक कार्य में लगा रहता है तो उसका मन ना तो परिवार, समाज एवं विभाग की सेवा सही ढंग से नहीं कर पाता है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में लोग शारीरिक श्रम करते थे, आज मशीनी युग में व्यक्ति आराम तलब हो गया है। उपवन संरक्षक शशिशंकर पाठक ने कहा कि टीम भावना के साथ खेलकर अपने नेतृत्व क्षमता को निखारने का प्रयास करना महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर उपवन संरक्षक कपिल चन्द्रवाल सहित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

यह हुई प्रतियोगिताएं
सहायक उपवन संरक्षक सुरेश मिश्रा ने बताया कि जिला स्तरीय वन विभाग खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन स्वच्छ तन- तो संरक्षित वन के तहत किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता के तहत गुरुवार को 100 मीटर, 400, 1500 मीटर महिला एवं पुरुष दौड़, चार गुणा 200 मीटर पुरुष-महिला रिले दौड़, 8 00 मीटर पचास वर्ष से अधिक आयु की महिला एवं पुरूष दौड़, गोला फेंक, जेवलिन थ्रो, लम्बी कूद एवं ऊंची कूद आयोजित की गई।

आज यह होंगी प्रतियोगिता
एसीएफ सुरेश मिश्रा ने बताया कि शुक्रवार को कबड्डी, बैडमिंटन, एकल बैडमिंटन, युगल एवं रस्साकसी प्रतियोगिताएं महिला एवं पुरुष वर्ग में आयोजित की जाएंगी। प्रतियोगिता में करौली-मासलपुर, हिण्डौन-गुढ़ाचन्द्रजी, मंडरायल-सपोटरा, डिवीजन-गश्ती दल की टीमें भाग ले रही हैं।

वीरेंद्र की चेन्नई में गोल्डन हैट्रिक
पटोंदा . चेन्नई में हुई राष्ट्रीय मूक बधिर चैम्पियनशिप प्रतियोगिता में तीसरी बार नादौती के बालाखेड़ा निवासी वीरेंद्र सिंह पोसवाल ने दौड़ में स्वर्ण पदक जीता है। 27 से 31 जनवरी तक हुई प्रतियोगिता में वीरेंद्र सिंह ने सभी संभागियों को पीछे छोड़ गोल्ड मैडल हासिल किया।
राजेश पोसवाल ने बताया कि छोटे भाई वीरेंद्र सिंह ने 23 वी राष्ट्रीय मूक बधिर एथलेटिक्स प्रतियोगिता में 10 किलोमीटर की दौड़ को निर्धारित समय से
पूर्व पूरी कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इससे पहले वीरेंद्र ने 21 व 22 वी राष्ट्रीय प्रतियोगता में भी स्वर्ण पदक प्राप्त किया था। वीरेंद्र ने जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में दौड़ का प्रशिक्षण लिया था। उसकी ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने की तमन्ना है। बेेटे की सफलता पर पिता समय सिंह व अन्य परिजन फूले नहीं समा रहे हैं।



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