- चित्तौडग़ढ़. पॉली हाउस स्थापना के नाम पर राज्य उद्यान विभाग से अनुदान के रूप में लाखों रुपए की राशि प्राप्त की। इसके बाद पॉली हाउस गैर कानूनी तरीके से खुर्दबुर्द कर बेचान भी कर दिया। कुछ मामलों में तो पॉलीहाउस की भूमि पर आवासीय भूखण्ड भी काट दिए। ऐसा करने वालों ने चार पॉली हाउस संचालकों में प्रत्येक पर २७ लाख ८१ हजार रुपए क अनुदान राशि का गबन व दुरूपयोग का आरोप है। विभाग मय ब्याज अब करीब एक करोड़ ३५ लाख रुपए की राशि वसूल करा ने के लिए पुलिस से कानूनी कार्रवाई करने की भी गुहार लगा रहा है। विभाग के सहायक निदेशक ने २३ जनवरी को चित्तौडग़ढ़ कोतवाील में इनके खिलाफ आपराधिक साजिश रचकर धोखाधड़ी करते हुए राजकीय अनुदानित पॉली हाउस को गैर कानूनी तरीके से खुर्दबुर्द एवं बेचान करने की रिपोर्ट दी। पुलिस ने आठ दिन बाद भी सरकारी पैसे को डकार जाने वाले लोगों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। विभाग ने पुलिस अधीक्षक को भी पत्र से मामले की जानकाारी दी लेकिन जांच रफ्तार नहीं पकड़ सकी। इसके पीछे अनुदान डकार जाने वाले लोगों की कथित राजनीतिक पहुंच के कारण पुलिस पर किसी तरह की सख्त कार्रवाई नहीं करने का दबाव बना होने की चर्चा भी है। गौरतलब है कि जिले में सरकारी अनुदान से करीब २०० पॉलीहाउस संचालित हो रहे है। इनमें प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुरूप खेती के लिए वातवरण निर्मित किया जाता है।
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क्या है प्रकरण
उद्यान विभाग ने करीब एक पखवाड़े पहले आम सूचना के माध्यम से सूचित किया कि पॉली हाउस के लिए २७.८१ लाख का अनुदान पाने वाले निर्मलसिंह राठौड़, घनश्याम पुरावत, राजबहादुर व प्रकाशकंवर चौहान ने आपराधिक साजिश रचकर धोखाधड़ी करते हुए राजकीय अनुदानित पॉली हाउस को गैर कानूनी तरीके से खुर्दबुर्द एवं बेचान का दिया। इनको मय ब्याज सात दिन में अनुदान राशि लौटाने के लिए कहा गया। इस आम सूचना के बावजूद किसी के अनुदान लौटाने के लिए आगे आने पर पर अब नया नोटिस जारी कर उनकी परिसपंतियों की भी जानकारी दी गई है।
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गबन राशि मय ब्याज वसूली के लिए नीलाम हो सकती परिसंपतियां
उद्यान विभाग ने मामले में अनुदान राशि मय वसूली के लिए पीडीआर एक्ट के तहत कार्रवाई करने के लिए जिला कलक्टर को भी पत्र भेज दिया है। विभाग के सहायक निदेशक ने अनुदान राशि का गबन करने वालों की परिसपंतियों की जानकारी भी आम सूचना के माध्यम से दी है।
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क्या है अनुदान पाने के नियम
पॉली हाउस स्थापना के लिए उद्यान विभाग की ओर से लघु एवं सीमान्त कृषकों के ७० प्रतिशत एवं बड़े कृषकों को ५० प्रतिशत राशि दी जाती है। शेष राशि सम्बन्धित कृषक को जुटानी होती है। अनुदानित राशि का उपयोग कर बने पॉली हाउस को बेचा या खुर्द-बुर्द नहीं किया जा सकता। ऐसा करने पर अनुदानित राशि मय ब्याज वसूली जा सकती है।
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हमारे स्तर पर हम अनुदान लेकर पॉलीहाउस बनाने के बाद उसे खुर्द-बुर्द करने वालों के खिलाफ जो भी कार्रवाई संभव हो सकती वो कर रहे है। राशि वसूली के लिए प्रयास कर रहे है। पुलिस में भी हमने रिपोर्ट दी लेकिन अभी ठोस कार्रवाई होते नहीं दिख रही।
अजयसिंह शेखावत, सहायक निदेशक, उद्यानिकी विभाग,चित्तौडग़ढ़
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पॉलीहाउस की अनुदान राशि गबन के मामले में उद्यान विभाग के परिवाद पर जांच जारी है। सभी पहलूओं की पड़ताल हो रही है। कुछ बिंदुओं पर विभाग से जानकारी मांगी गई है। जांच के बाद जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
ओमप्रकाश सोलंकी, कोतवाली थानाप्रभारी, चित्तौैडग़ढ़





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