Breaking News
recent

चंबल के फिरौती किंग रहे हरी सिंह ने बयां की अपनी दास्तां

धौलपुर (बाड़ी).

बंदूक से गोली और जुबान से गालियां की निशानी चंबल का बीहड़ में कई डकैतों की कहानियां छुपी है। इसमें एक कहानी बीहड़ में अपहरण व फिरौती किंग के नाम से प्रसिद्ध हरीसिंह परमार की। धौलपुर के डांग क्षेत्र के गांव सेवर में किसान परिवार में जन्मे और पहलवानी का शौक रखने वाले हरीसिंह ने जमीनी विवाद को लेकर बंदूक उठा ली और आठ साल तक बीहड़ में आंतक का पर्याय बने रहे। आत्मसमर्पण के बाद 14 साल से जेल में काटी और अब समाज को पूर्व डकैत रहे हरी सिंह यह संदेश देना चाहते है विपरित परिस्थितियों में ना हारे हिम्मत समाज की मुख्य धारा ही असली जीवन है, अपराध की दुनियां बेकार है, अगर आपके सामने विपरित परिस्थतियां आए तो गुस्सा कम और दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए।

कैसे शुरू हुआ बीहड़ों का सफर
धौलपुर के डांग इलाके के गांव सेवर निवासी हरी सिंह परमार वर्ष 1996 से 14 साल चार महीने तक ग्वालियर की खुली जेल सहित कई जेलों में सजा काट चुके है और जब हरी सिंह को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने उन्हें शिवपुरी जिले की पोड़ी तहसील में 300 वीघा जमीन भी दी है, यहां वे अपने परिवार के साथ रह रहे है।
कभी चंबल के कुख्यात डकैत रहे हरिसिंह परमार जिस पर राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ केंद्र सरकार द्वारा 2 लाख रुपये का इनाम रखा गया था। परमार पर तीन प्रदेशों में 234 मुकदमे दर्ज थे। जिनमें हत्या, अपहरण, लूट जैसे संगीन मामले शामिल थे। परमार ने बताया की वह राजस्थान के धौलपुर जिले के डांग क्षेत्र के गांव सेवर गांव के काश्तकार ठाकुर हरगोविंद सिंह के पुत्र है। वर्ष 1985 गांव में उनकी जमीन पर गांव के कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया, इसे लेकर सरकार के यहां गुहारें भी लगाई गई, लेकिन चार साल तक कोई भी न्याय नहीं मिला तो इसके बाद वर्ष 1989 में जमीन पर कब्जा करने वाले एक शक्स की गला रेंत कर हत्या कर दी और बीहड़ की दुनियां में अपना कदम रख दिया। यहां करीब 8 साल तक बीहड़ कई वारदातें की। इसमें अधिकांश वारदातें अपहरण और फिरौती की थी। आखिर में मीडिया और अन्य लोगों की समझाइश पर उन्होंने अपने दो साथियों के साथ सरेंडर कर दिया। परमार से बताया कि मूलत: काश्तकार रहे और पहलवानी उनका शौक था लेकिन जब परिवार पर आई और सरकार ने कोई सुनवाई नहीं की तो उन्होंने बीहड़ में कदम रख दिया।
फिरौती किंग के नाम से प्रसिद्ध
बीहड़ में हरी सिंह परमार को अपहरण व फिरौती किंग के नाम से जाना जाता था। वर्ष 1989 से 1996 तक आठ साल तक बीहड़ में रहते हुए 200 से अधिक अपहरण व फिरौती की वारदातों को अंजाम दिया। समझाइश पर वर्ष 1996 में एमपी के डीजी अयोध्या सिंह के सामने सीपरी जिले के बाला घाटी में शर्तो के आधार पर अपने एक भाई और एक साथी के साथ आत्मसमर्पण कर दिया।

तीन राज्यों में रहा आतंक
राजस्थान मध्य प्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश तीन राज्यों में आतंक का पर्याय रहे चंबल घाटी के दस्यु हरिसिंह के अपराध का क्षेत्र राजस्थान का धौलपुर, करौली, बारां मध्य प्रदेश का मुरैना, ग्वालियर, श्योपुर और यूपी के जालोन, इटावा आदि रहे।
चौदह साल रहा जेल, रिहाई तो सुधर गया जीवन
1996 से 14 साल चार महीने तक ग्वालियर की खुली जेल सहित कई जेलों में सजा काटने के बाद जब हरिसिंह रिहा हुआ तो उसने समाज की मुख्यधारा से जुड़ते हुए सरकार द्वारा सीपरी जिले की पौड़ी तहसील में दी गई 300 बीघा जमीन से जीवन शुरू किया। आज अपने परिवार के साथ रह रहा है और उसे फार्म हॉउस का रूप दिया है।
विपरित परिस्थितियों में ना हारे हिम्मत
राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश क्षेत्र में अपराध का पर्याय रहे कुख्यात डकैत हरी सिंह परमार का कहना है कि समाज की मुख्य धारा ही असली जीवन है, अपराध की दुनियां बेकार है, अगर आपके सामने विपरित परिस्थतियां आए तो गुस्सा कम और दिमाग का ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए। सरकार और पुलिस को भी पीडि़त को न्याय दिलाने के लिए समय रहते सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए।
नोट- इस खबर का उद्देश्य किसी भी अपराध या अपराधी को बढ़ावा देना नहीं है। कानून और सामाजिक नियमों की पालना सभी के लिए आवश्यक है।



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.