दर्जी के बेटे ने खटखटाया इंडिया क्रिकेट टीम का दरवाजा
रणजी ट्रॉफी में लिए सर्वाधिक 51 विकेट
राजस्थान रॉयल्स से आईपीएल खेलेंगे
एक ही रणजी सत्र में सर्वाधिक विकेट लेने वाले इंडिया के पहले मीडियम पेसर बॉलर बने
-अखबार बांटने और रेहड़ी लगाकर कपड़े बेचने का काम कर चुके है तनवीर
धौलपुर. दुनिया भर में अनेकों ऐसे उदाहरण है जिनकों देखने के बाद यह मालूम पड़ता है कि चुनौतियां के बावजूद भी सफलता पाई जा सकती है। आज असफल इंसान किसी न किसी को अपनी असफलता का कारण बता कर अपना पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन जो उन परिस्थितयों के विपरीत जाकर लगातार संघर्ष करता है वहीं कल का इतिहास बन जाता है। आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स से रूबरे कराने जा रहे है, जिसने अपने कठिन परिश्रम से अपने जीवन में वो पाया जो कि उसने कभी सोचा भी नहीं था। और बन गया लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का सूत्र। हम बात कर रहे है कि धौलपुर के पटपरा मोहल्ला निवासी तनवीर उल हक उर्फ मंजिल की। मंजिल ने इस रणजी सत्र में सर्वाधिक 51 विकेट लेकर इंडिया के पहले गेंदबाज बन गए है। जबकि इससे पहले राजस्थान के कोई रणजी खिलाड़ी इस मुकाम तक नहीं पहुंच पाए थे।
बेहद गरीब घर से मंजिल का नाता
राजस्थान के छोटे शहर धौलपुर से निकल कर रणजी तक का मुकाम हासिल करने वाले तनवरी उर्फ मंजिल को काफी परेशानियों का सामना पड़ा। तनवरी के पिता संतर रोड पर एक दुकान पर दर्जी का काम करते है। घर के आर्थिक स्थिति को सहारा देने के लिए तनवरी ने अखबार बांटे और रेहड़ी पर कपड़े भी बेचे। वैसे तो तनवरी उर्फ मंजिल बल्लेवाज बनना चाहते थे, लेकिन बल्ला खरीदने को पैसे नहीं होने के कारण गेंद से ही खेल की शुरूआत की और गेंदबाज बन गए।
2004 में पड़ी तनवीर पर नजर
आरसीए के पूर्व सचिव सोमेंद्र तिवारी ने बताया कि वर्ष 2004 में जब उन्होंने धौलपुर की बड़ी फिल्ड में गेंदबाजी करते हुए देखा तो उनकी प्रतिभा को जाना और 13 वर्ष तक लगातार मेहनत कराके तराशा। तिवारी ने बताया कि तनवीर रणजी में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर टीम इंडिया के लिए अपनी दस्तक दे चुका है। 27 वर्षीय तनवीर लगातार तीन साल से रणजी खेल रहे है, चयनकर्ताओं का उनकी ओर ध्यान आकर्षित हुआ है, वह रणजी मैचों में 105 विकेट ले चुके है।





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