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कई देशों की जनसंख्या से भी ज्यादा है कोटा कचौरी की खपत..पीएम मोदी से लेकर कई सेलिब्रिटी भी है इसके दीवाने

जायका तो वही होता है जो आपकी जुबान पर चढ़कर बोले और उसे लाख चाहने के बाद भी ना भुलाया जा सके। कोटा की कचौरी का स्वाद भी कुछ ऐसा ही है। चटपटी, हींग की खुशबू में डूबी और एक दम खस्ता। आइए जानते हैं कि लोग इसके दीवाने क्यों हैं। पिज्जा-बर्गर की एंट्री के बावजूद कचौरी की डिमांड क्यों बढ़ रही है।

पूरा देश भले ही पिज्जा और बर्गर का दीवाना हो, लेकिन कोटा के लोगों की जुबान पर कोटा कचौरी का जायका ही छाया हुआ है। उदड़ की दाल से बनने वाली इस खास कचौरी के जायके का सफर रियासतकाल में शुरु हुआ जो आधुनिकता की निशानी समझे जाने वाले खाने-पीने पर भी भारी पड़ गया। इसका अंदाज इसी बात से लगा सकते हैं कि कोटा में 350 से ज्यादा दुकानों और करीब इतने ही ठेलों पर हर रोज 6 लाख से ज्यादा कचौरियां बिकती हैं। जिन्हें लोग बड़े चाव से खाते हैं। कई देशों की जनसंख्या कोटा कचौरी की खपत से भी कम है।

आईआईटी में दाखिले की गारंटी माने जाने वाले कोटा के कोचिंग संस्थानों की पूरे देश में धाक है। हर साल डेढ़ लाख से ज्यादा बच्चे पूरे देश से यहां पढऩे आते हैं। इन बच्चों को लजीज खाना परोसने के लिए तमाम नामी रेस्टोरेंट और फास्टफूड कंपनियों ने कोटा में अपनी दुकानें खोली, लेकिन इन सबके बावजूद कोटा की कचौरी को नहीं पछाड़ सके। आलम यह है कि मेट्रो सिटीज से आने वाले बच्चे भी कोटा की कचौरी के दीवाने हो गए। शायद ही कोटा की कोई ऐसी गली होगी जिसमें कचौरी की दुकान ना हो। जहां सुबह आठ बजे से लेकर रात को आठ बजे तक कचौरी खाने वालों की कतार ना लगी हो।

 

दुनिया में बनाई पहचान
कोटा की कचौरी ने देश ही नहीं दुनिया में अपनी खास पहचान बनाई है। अल्फांसो के आम और दार्जलिंग टी की तरह ही कोटा की कचौरी भी 'ज्योग्राफिकल आइडेंटिफिकेशन' के तौर पर दुनिया भर में मशहूर है। उड़द की दाल में हींग के तड़के के साथ तली जाने वाली इस खास कचौरी को बौद्धिक संपदा प्रकोष्ठ ने 'कोटा कचौरी' के नाम से बौद्धिक संपदा के अधिकार में खास तौर पर दर्ज किया है।

जायके का तोड़ नहीं
उड़द की दाल में हींग, गर्म मसाले और खड़ी मिर्च डालकर तैयार होने वाली इस कचौरी के जायके का कोई तोड़ नहीं है। एक कचौरी का वजन करीब 80-85 ग्राम होता है। जिसमें करीब 55-60 ग्राम दाल और मसालों का मिक्सचर भरा जाता है। तेज आंच पर सेकने से एक दम खस्ता हो जाती है। जिसे लोग चटनी के साथ बड़े चाव से खाते हैं।



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