सीकर.
प्रदेश के प्रतिभावान होनहारों की मेरिट की उम्मीदों पर सियासी ताला लगा हुआ है। पिछली सरकार के समय बंद हुई मेरिट को लेकर भले ही उस समय खूब सियासत हुई हो लेकिन कांग्रेस सरकार भी मेरिट के मामले में कोई निर्णय नहीं कर पाई है। प्रदेश के निजी स्कूल संचालकों के साथ होनहार विद्यार्थी भी मेरिट की घोषणा की चाह में है। लेकिन राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के अपने अलग दावे है। सरकार का दावा है कि मेरिट के मामले में सरकार समीक्षा करा रही है, जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा। खास बात यह है कि पिछले आठ वर्षो में सर्वाधिक मेरिट शेखावाटी के विद्यार्थियों ने हासिल की है। ऐसे में यहां के होनहारों में मेरिट का क्रेज ज्यादा है। विद्यार्थियों का कहना है कि मेरिट से प्रतिस्पर्धा ज्यादा रहती है।
सरकार फायदे और नुकसान के गणित में जुटी
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद शिक्षा राज्य मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा से निजी स्कूल संचालकों ने बैठक की। इस दौरान मेरिट इसी सत्र से घोषित करने की मांग रखी। इस दौरान राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की बैठक में शिक्षा राज्य मंत्री ने बोर्ड अधिकारियों को मेरिट मामले की समीक्षा कराने के निर्देश दिए।
मेरिट होने के बाद यह फॉमूर्ला
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने मेरिट पर रोक लगाने के बाद फॉमूर्ला लागू किया। इसके तहत अब सभी संकायों के टॉप तीन-तीन विद्यार्थियों की सूची जारी की जाती है। इसके तहत बोर्ड के दीक्षांत समारोह में होनहारों को मेडल देकर सम्मानित किया जाता है। नए फॉमूर्ले में भी शेखावाटी के सबसे ज्यादा होनहारों का चयन हुआ।
राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से पहले मेरिट जारी किए जाने का प्रावधान था। लेकिन बोर्ड ने किसलिए मेरिट बंद की है, इसकी सरकार समीक्षा करा रही है। -गोविन्द सिंह डोटासरा, शिक्षा राज्य मंत्री
मेरिट से होनहारों के साथ स्कूल संचालक भी प्रोत्साहित होते है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को विद्यार्थियों की भावनाओं को समझते हुए मेरिट इसी सत्र से घोषित करनी चाहिए। संघ के प्रतिनिधिमंडल की इस संबंध में शिक्षा राज्य मंत्री से सकारात्मक वार्ता भी हो चुकी है। -बीएल रणवां, अध्यक्ष, जिला निजी शिक्षण संस्थान संघ





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