तारानगर. साहवा गांव में पराली का बढ़ता प्रदूषण लोगों में अनेक प्रकार की बीमारियां फैला रहा है लेकिन लापरवाह प्रशासन मौन बैठा है। प्रशासन की नाक के नीचे सड़क के दोनों किनारे खुले हुए अवैध चारा डिपो से पूरे दिन भर निकलने वाली प्रदूषित हवा में लोगों का सांस लेना तक दूभर हो रहा है। पराली के प्रदूषण की वजह से लोगों में श्वास, स्कीन एलर्जी, जुकाम, खांसी, नाक में पानी बहना आदि अनेक प्रकार की बीमारियां सामने आ रही है। गुरुवार को नोहर-भादरा तिराहे पर संचालित दो निजी स्कूलों के दो दर्जन से अधिक बच्चों में स्कीन एलर्जी, खुजली, आंख में पानी आना आदि की शिकायत होने पर स्कूल प्रशासन बच्चों का चेकअप करवाने उन्हें साहवा के मोहनी देवी चाचाण राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र लेकर पहुंचा। स्कूल के बच्चों ने बताया कि उन्हें पराली के प्रदूषण से पिछले कई दिनों से स्कीन एलर्जी, खुजली, आंख में पानी आना, खांसी आदि की शिकायत हो रही है। अस्पताल के चिकित्सक ने सभी बच्चों का चेकअप कर उनका इलाज किया। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि स्कूल के अनेक बच्चें इस प्रकार की बीमारियों की शिकायत करते रहते है। साहवा में लम्बे समय से पराली काटने का काम किया जा रहा है जिससे उडऩे वाली धूल व गर्द से आसपास का पूरा वातावरण प्रदूषित हो रहा है। जिससे आने-जाने वाहनों और आसपास रहने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि पराली चारा डिपो संचालक राजनीतिक संरक्षण व अधिकारियों को सुविधा शुल्क देकर क्षेत्र में अवैध पराली बिक्री का गोरखधंधा कर रहे है जिसका खमियाजा आसपास के क्षेत्र के लोगों व स्कूल में पढऩे वाले बच्चों को भुगतना पड़ रहा है। साहवा क्षेत्र में नोहर-भादरा तिराहे पर चलने वाली पराली टाल अवैध रूप से संचालित है। पराली के बढ़ते प्रदूषण से आसपास के क्षेत्र के लोगों ने प्रदूषण विभाग को भी शिकायत की थी जिस पर विभाग ने मौका निरीक्षण किया तथा इसे आसपास के लोगों के लिए घातक बताकर प्रशासन को भी कार्रवाई करने के लिए लिखा था लेकिन प्रदूषण विभाग के निरीक्षण के कई महीने बीत जाने के बाद भी स्थानीय प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।





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