मनीष मिश्रा.
झुंझुनूं. देश या विदेश में रहने वालों के मन में उम्मीद रहती है कि अंत समय में उसका अंतिम संस्कार उसी मिट्टी में किया जाए, जहां वह बचपन में खेला है। जहां उसका जन्म हुआ है। जहां से उसका दिल से जुड़ाव रहा है।विदेश कमाने जाने के दौरान कई बार ऐसी कानूनी अड़चनें आ जाती है कि शव को स्वदेश लाना मुश्किल हो जाता है।
ऐसे में कोई व्यक्ति अपने को उन तक पहुंचा दे तो वो किसी फरिश्ते से कम नहीं होता। झुंझुनूं के गांव सोती का बेटा गुलाम खां पिछले बीस सालों से इस काम में जुटा हुआ है। फिलहाल रियाद में रहने वाले इस बेटे की बदौलत हर माह करीब देश के अलग-अलग कोनों में शवों को भिजवाने का कार्य किया जा रहा है।
जिले के छोटे से गांव सोती निवासी गुलाम खां ने बताया कि कमाने के लिए विदेश गए थे, लेकिन एक हादसे ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। वर्ष 1987 में उनकी बुआ के दामाद का इंतकाल हो गया।देश में बैठे हुए परिजन दफनाने के लिए इंतजार में थे। लेकिन दस्तावेजों की कमी के कारण वहां की सरकार ने शव सौंपने से इंकार कर दिया।करीब दो माह तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पर शव सौंपा गया। गुलाम खां ने बताया कि उस दिन से संकल्प ले लिया कि ऐसे परेशान लोगों की मदद करेंगे।
बनाया मारवाड़ वेलफेयर संगठन
इस काम में लोगों की मदद करने के लिए मारवाड़ वेलफेयर नाम से संगठन बनाया,इसमें जानकारों को भी जोड़ा गया।धीरे-धीरे ऐसे लोगों की तलाश करने लगे जो कि इस तरह की परेशानी से गुजर रहे हैं।उन्होंने बताया कि विदेश में रहने वाले लोगों के सामने सबसे बड़ी परेशानी भाषा, कानून व रुपयों की आती है।इस काम में मददगार की भूमिका निभाते हए पिछले बीस सालों से हर माह देश के विभिन्न कोनों में करीब चार-पांच शवों को वतन भिजवा रहे हैं।
गलत वीजा बड़ा कारण
गुलाम खां ने बताया कि कामगारों के स्वदेश लौटने में सबसे बड़़ी परेशानी गलत वीजा की होती है। एजेन्ट भोलेभोले लोगों को अच्छी नौकरी व मोटी तनख्वाह का झांसा देकर विदेश भेज देते हैं।लेकिन जिस वीजा पर उन्हें भेजा जाता है, वो काम नहीं देकर उन्हें दूसरे कामों में लगा दिया जाता है। विदेश पहुंचने के बाद उनका पोसपोर्ट व सामान छीन लिया जाता है।
स्वदेश वापसी के लिए कोई पुख्ता कानूनी दस्तावेज नहीं होने के कारण कामगार यहां फंस जाते हैं। ऐसे लोग उनसे सम्पर्क करते हैं तो दूतावास पहुंचकर दस्तावेज तैयार कर स्वदेश भेजते हैं। इस दौरान कामगारों के खाने-पीने व रहने की व्यवस्था सोसायटी की ओर से की जाती है।इसके अलावा सोसायटी की ओर से किसी मामले में फंसे हिन्दुस्तानियों को कानूनी मदद मुहैया करवाती है।अबतक ऐसे सैकड़ों लोगों को वतन भेज चुके हैं।





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