चित्तौडग़ढ़. यूनेस्को की विश्व विरासत में शामिल शौर्य व त्याग की धरा चित्तौड़ दुर्ग पर प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक आ रहे हंै। इसके बावजूद यहां पर्यटन उद्योग नहीं पनप पा रहा है। पर्यटन से जुड़े लोगों का मानना है कि देशी पर्यटक तो खूब आ रहे लेकिन विदेशी पर्यटकों की संख्या बढऩे पर ही यहां कारोबार को पंख लग सकते हैं। आने वालों में विदेशी पर्यटकों की अब भी कमी होने से उनको आकर्षित करने के लिए अब फोकस किया गया है। इसी के तहत १० से १२ फरवरी तक पहली बार चित्तौड़ फोर्ट फेस्टिवल का आयोजन किया गया। यह पूरा फेस्टिवल विशेष रूप से विदेशी पर्यटकों पर ही केन्द्रित था। इसके माध्यम से यहां की संस्कृति व सभ्यता के विभिन्न रंगों से विदेशी मेहमानों को परिचित कराया गया। मकसद यही है आने वाले दिनों में विदेशी सैलानियों की संख्या बढ़े और पर्यटन से जुड़े कारोबार को पंख लग सके, लेकिन हकीकत यह है कि पर्यटन सुविधाओं के नाम पर झोली खाली है।
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रात में ठहरे तो कुछ बात बने
पर्यटन व्यवसाय में लगे होटल कारोबारियों की मजबूरी यह है कि सुविधाएं तीन व पांच सितारा स्तर की तो कर दें पर उनमें ठहरने के लिए पर्यटक ही नहीं होंगे तो खर्च कैसे चलेगा। चित्तौड़ में पर्यटन सुविधाओं के विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा अधिकतर देशी-विदेशी मेहमानों के यहां रात्रि प्रवास नहीं करने को माना जाता है। इसके चलते पर्यटक उदयपुर, अजमेर आदि स्थान से यहां पहुंच कुछ ही घंटे में दुर्ग भ्रमण कर फिर चित्तौड़ से विदा हो जाता हैं। पर्यटकों को रात्रि ठहराव के प्रति आकर्षित करने के लिए दुर्ग पर लाइट एंड साउण्ड शो शुरू किया गया लेकिन ये भी उनका यहां ठहराव सुुनिश्चित नहीं कर पाया।
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यह बड़ी बाधाएं विकास की राह में
- चित्तौडग़ढ़ के लिए नियमित हवाई सेवाओं का अभाव पर्यटन विकास की राह में बड़ी बाधा बन गया है। ऐसे में बड़े शहरों से हवाई मार्ग से आने वाले देशी-विदेशी पर्यटक उदयपुर के डबोक हवाई अड्डा उतरते हैं।
- चित्तौड़ दुर्ग पर घूमने के लिए अब तक कार टेक्सी की सुविधाएं भी शुरू नहीं हो पाई है। स्वयं का वाहन उपलब्ध नहीं होने पर दुर्ग घूमने के लिए ऑटो रिक्शा ही माध्यम है।
-चित्तौड़ में पर्यटकों के रात नहीं ठहरने का बड़ा कारण यहां पांच सितारा या तीन सितारा स्तर के लग्जरी होटल का नहीं होना है।
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बन सकता पर्यटन सर्किट
पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग मानते है कि चित्तौडग़ढ़ के आसपास के सांवलियाजी, मेनाल ख्यातनाम आदि स्थानों को शामिल करते हुए पर्यटन सर्किट बनाया जाए तो यहां होटल उद्योग व अन्य पर्यटन सुविधाओं का विस्तार हो सकता। पर्यटकों को इस बात के लिए प्रेरित किया जाए कि शाम को चित्तौड़ दुर्ग देखने के बाद वो यहां ठहर अगले दिन सांवलियाजी,मेनाल आदि स्थानों पर घूमने के लिए जा सकते है। इसके लिए सबसे बड़ी जरूरत पर्यटकों के लिए यहां अच्छे स्तर की होटले शुरू करना है। पर्यटक रात्रि ठहराव करने लग जाए तो जिले की अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिल सकता है।
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कितने विदेशी सैलानी आते चित्तौड़ घूमने
दुर्ग पर जनवरी २०१७ से लेकर दिसम्बर २०१८ तक १० लाख से अधिक देशी पर्यटक आए। इसके विपरीत विदेशी पर्यटकों की संख्या दो वर्ष में करीब ३२ हजार ही रही। विश्व धरोहर होने के बावजूद प्रतिमाह औसतन एक-डेढ़ हजार विदेशी सैलानी ही यहां आने से पर्यटन कारोबार को गति नहीं मिल पाई। वर्र्ष २०१७ में सर्वाधिक २४४७ विदेशी सैलानियों ने नवंबर में दुर्ग का भ्रमण किया। वर्ष २०१८ में सर्वाधिक २८६६ सैलानी फरवरी में भ्रमण के लिए चित्तौड़ दुर्ग पहुंचे।
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चित्तौड़ जिले में दुर्ग सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर विदेशी पर्यटक बढ़ें, इसके लिए गंभीरता से प्रयास हो रहे हैं। चित्तौड़ फोर्ट फेस्टिवल भी इसी की एक कड़ी है। पर्यटकों के लिए आकर्षण व सुविधाएं भी बढ़ाई जा रही हैं। -शिवांगी स्वर्णकार, जिला कलक्टर, चित्तौडग़ढ़
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पिछले कुछ वर्षों में चित्तौड़ दुर्ग केे विकास व सुविधाओं के विस्तार के लिए गंभीरता से प्रयास किए गए हैं। केन्द्र सरकार ने दुर्ग विकास के लिए कई कार्य स्वीकृत किए हैं। देशी-विदेशी पर्यटकों की संख्या भी आने वाले समय में बढ़ेगी। -सीपी जोशी, सांसद, चित्तौडग़ढ़





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