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अवैध खनन की जकड़ में अरावली, रिकॉर्ड में अतिक्रमण भी दर्ज नहीं

जिले में अवैध खनन से अरावली पर्वतमाला को बड़ा नुकसान हुआ है। पहाड़ खत्म होने का सबसे ज्यादा असर पारिस्थितिक एवं जैव विविधता पर पड़ा है। वहीं राजस्व को भी बड़ा नुकसान हुआ। सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा के निकटवर्ती तिजारा, भिवाड़ी क्षेत्र में अवैध खनन से हुआ। बाद में एनजीटी ने अलवर जिले में अवैध खनन से हुए नुकसान की भरपाई हरियाणा के क्रशरों से करने के आदेश दिए।

सरिस्का क्षेत्र को भी नहीं छोड़ा

सरिस्का बाघ परियोजना में बाघों की दहाड़ से भले ही लोगों में भय रहता हो, लेकिन खान माफिया को बाघों की दहाड़ भी नहीं रोक पाई। यही कारण है कि फोरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया में सरिस्का क्षेत्र में 25 ज्यादा खनन स्थल चिह्नित किए गए हैं। वहीं मूण्डली में गत 9 फरवरी को ही अवैध तरीके से खनन करने वालों के खिलाफ वन अधिनियम व वन्यजीव अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया गया है। यह हालत तब है जबकि सरिस्का व आसपास के 10 किलोमीटर की परिधि में नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ की स्वीकृति के बिना खनन गतिविधियों पर रोक है।

खुद एनजीटी ने माना जिले में अवैध खनन

एनजीटी ने दिसम्बर 2017 में आदेश जारी कर अवैध खनन से अलवर जिले को हुए करोड़ों रुपये के नुकसान की भरपाई हरियाणा सरकार से करने को कहा। इस आदेश में एनजीटी ने अवैध खनन के खनिज को खपाने वाले हरियाणा के 379 क्रशरों से जुर्माना वसूलकर अलवर को लौटाने को कहा है। यह पहला मौका था जब एनजीटी ने अलवर जिले में अवैध खनन पर मुहर लगाई और जुर्माना लगाकर किसी प्रदेश को पेनल्टी की राशि देने के आदेश दिए। हालांकि एनजीटी के आदेश के बाद भी हरियाणा सरकार ने इस राशि का भुगतान नहीं किया है।

जिले को करीब 430.80 करोड़ का हुआ नुकसान

अवैध खनन से अलवर जिले को 430.80 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ। अवैध खनन के चलते अलवर जिले की अरावली पहाडि़यों से 52283390 मीट्रिक टन मिनरल्स निकाला गया। इसमें से ज्यादातर मिनरल्स अवैध तरीके से परिवहन कर हरियाणा भेजा गया। पूर्व में जिला कलक्टर अलवर की एनजीटी में पेश रिपोर्ट में जिले में करीब 480.80 करोड़ रुपए के नुकसान का आंकलन किया गया था।

रिपोर्ट नहीं होने से बढ़ रहा अवैध खनन

जिले के ज्यादातर पहाड़, नदी आदि सरकारी सम्पत्ति है। ये गैर मुमकिन पहाड़, गैर मुमकिन नदी, जोहड़, तालाब, सिवायचक के रूप में राजस्व रेकॉर्ड में दर्ज हैं। इन सरकारी सम्पत्ति पर किसी भी प्रकार की गतिविधि होने पर उसे अतिक्रमण मान संबंधित पटवारी की ओर से अतिक्रमण की धारा ९१ में रिपोर्ट करनी होती है। इस रिपोर्ट के आधार पर तहसीलदार को पेनल्टी या सजा तक सुनाने का अधिकार है। जिले के पहाड़ों में अवैध खनन होने के बाद भी ज्यादातर स्थानों पर अतिक्रमण की रिपोर्ट ही नहीं की जाती, जिससे खान माफिया के हौसले बुलंद हैं और राजस्व रेकॉर्ड में अवैध खनन दर्ज नहीं हो पाता।



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