चित्तौडग़ढ़. राजस्थान के इतिहास में वीरता के उदाहरण में से एक चित्तौड़(मेवाड़) के पूर्व शासक महाराणा संग्रामसिंह (सांगा) की पुण्यतिथि पर पहली बार विभिन्न संस्थाओं की ओर से श्रद्धाजंलि अर्पित की गई। वर्ष १५२७ में मुगलवंश के प्रथम शासक बाबर के साथ खानवा युद्ध में गंभीर घायल होने के बाद ३० जनवरी १५२८ को मृत्युप्राप्त राणा सांगा की पुण्यतिथि पर कभी श्रद्धाजंलि नहीं देने का मुद्दा राजस्थान पत्रिका ने बुधवार के अंक में प्रमुखता से उठाया। इसके बाद राजपूत समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठन व राणा सांगा के नाम पर ५० वर्ष पहले शुरू बाजार के व्यवसायी भी सक्रिय हुए। पुण्यतिथि पर शहर के राणा सांगा बाजार में लगी प्रतिमा पर श्रद्धाजंलि देने जौहर स्मृति संस्थान सहित विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि पहुंचे। अब तक अमूमन जौहर स्मृति संस्थान की ओर से चैत्र माह में आयोजित होने वाले जौहर मेले की शोभायात्रा के दौरान ही मार्ग में सांगा की प्रतिमा आने से पुष्पाजंलि अर्पित की जाती रही है।
जौहर स्मृति संस्थान व अन्य समाज के प्रबुद्धजनों द्वारा राणा सांगा बाजार स्थित प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। संस्थान के अध्यक्ष तख्तसिंह फाचर ने राणा सांगा के जीवन से जुडे प्रसंगों पर विचार व्यक्त किये। फाचर ने कहा कि महाराणा सांगा ने अपने शासनकाल में मेवाड़ को समृद्ध बनाया एवं चित्तौड़ के गौरवशाली इतिहास में सांगा की भूमिका को कोई नहीं भूल सकता। श्रद्धाजंलि अर्पित करने से पहले प्रतिमा की भवानीशंकर पाण्ड्या द्वारा पूजा अर्चना की गई। जौहर स्मृति संस्थान के शक्तिसिंह मुरलिया, मंगलसिंह झाड़ोली, नरपतसिंह भाटी, श्यामसिंह हाड़ा, आदित्यवीरसिंह गरियावली, कानसिंह सुवावा, लालसिंह अमराणा, भंवरसिंह खरड़ी बावड़ी, उदयसिंह सिंगोला के साथ राणा सांंगा बाजार के व्यवसाईयों ने भी श्रद्धाजंलि दी। जौहर क्षत्राणी संस्था की अध्यक्ष निर्मला राठौर व अन्य पदाधिकारी भी सांगा की प्रतिमा पर श्रद्धाजंलि देने पहुंचे।
क्षत्राणियों ने अर्पित की श्रद्धाजंलि
जौहर क्षत्राणी संस्था के पदाधिकारियों ने महाराणा संग्राम सिंह की ४९१वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित की।
संस्था के अध्यक्ष नर्मला राठोड़ उलपुरा,उपाध्यक्ष मीनाकंवर चौहान,टीनाकंवर चौहान, निक्की चौहान,करणी सेना की कॉलेज अध्यक्ष कुसुम भाटी,कविता चौहान आदि ने सांगा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया।





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