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यहां कलक्ट्रेट में नारे लगाने वाले विद्यार्थियों को पुलिस ने खदेड़ा,एएसपी पहुंचे जाप्ते के साथ


करौली. उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू किए १३ रोस्टर के विरोध में यहां कलक्ट्रेट में प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को पुलिस ने खदेड़ दिया। बाद में दो-तीन छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम नम्बोधित ज्ञापन जिला कलक्टर को सौंपा। छात्रसंघ अध्यक्ष राजेश मनेमा व एससी, एसटी छात्रसंघ अध्यक्ष धर्म मीना के साथ छात्र ज्ञापन देने कलक्ट्रेट में आए, इस दौरान उन्होंने मुख्य दरवाजे पर एकत्र होकर नारे लगाना शुरू कर दिया, जिससे कलक्ट्रेट में लोगों की आवाजाही बंद हो गई। जिसकी सूचना कलक्ट्रेट से एसपी कार्यालय में दी गई, इस पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रविन्द्र सिंह एसपी कार्यालय के जाप्ते के साथ कलक्ट्रेट पहुंचे। पुलिस ने छात्रों को खदेडऩा शुरू कर दिया। जिससे छाच्रो में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने सभी विद्यार्थियों को कलक्ट्रेट से बाहर निकाल दिया। इसके बाद कोतवाली के थानाधिकारी आध्यात्म गौतम ने जाप्ते के साथ पहुंच व्यवस्था संभाली।
१३ बिन्दु रोस्टर से रोष
पुलिस ने बाद में दो-तीन विद्यार्थियों को ज्ञापन देने के लिए जिला कलक्टर के पास भेजा। ज्ञापन में बताया कि कोर्ट के आदेश से उच्च शिक्षण संस्थाओं में 13 रोस्टर बिन्दू लागू हो गया है। इससे एसटी, एससी तथा ओबीसी के आरक्षण अधिकारों का हनन हुआ है। ज्ञापन में उल्लेख किया है कि 2 जुलाई १९९७ को एसटी, एससी वर्ग को विश्वविद्यालयों में भागीदारी सुनिश्चित करने २०० रोस्टर बिन्दु प्रणाली लागू की गई थी। इसका फायदा आरक्षित वर्ग को हुआ है। लेकिन नई व्यवस्था से अब नुकसान हो रहा है। ज्ञापन देने वालों में मनकेश कानापुरा, लवकुश, संतराम कसारा, विपिन मीना आदि मौजूद थे।

१३ बिन्दु रोस्टर से रोष
पुलिस ने बाद में दो-तीन विद्यार्थियों को ज्ञापन देने के लिए जिला कलक्टर के पास भेजा। ज्ञापन में बताया कि कोर्ट के आदेश से उच्च शिक्षण संस्थाओं में 13 रोस्टर बिन्दू लागू हो गया है। इससे एसटी, एससी तथा ओबीसी के आरक्षण अधिकारों का हनन हुआ है। ज्ञापन में उल्लेख किया है कि 2 जुलाई १९९७ को एसटी, एससी वर्ग को विश्वविद्यालयों में भागीदारी सुनिश्चित करने २०० रोस्टर बिन्दु प्रणाली लागू की गई थी। इसका फायदा आरक्षित वर्ग को हुआ है। लेकिन नई व्यवस्था से अब नुकसान हो रहा है। ज्ञापन देने वालों में मनकेश कानापुरा, लवकुश, संतराम कसारा, विपिन मीना आदि मौजूद थे। इसका फायदा आरक्षित वर्ग को हुआ है। लेकिन नई व्यवस्था से अब नुकसान हो रहा है। ज्ञापन देने वालों में मनकेश कानापुरा, लवकुश, संतराम कसारा, विपिन मीना आदि मौजूद थे।



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