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काली मिर्च भी मिलावट के फेर में, काले रंग से रंग रहे थे, स्वाथ्य विभाग ने कराई सीज

जयपुर. दाल, पनीर, सॉस, दूध, बादाम और मटर के बाद अब मसालों में भी मिलावट सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को विश्वकर्मा ओद्योगिक (वीकेआई) क्षेत्र में कार्रवाई कर 4340 किलो काली मिर्च सीज की है। जन-स्वास्थ्य निदेशक डॉ. वीके माथुर ने बताया कि वीकेआइ रोड पर हरीश अग्रवाल की फर्म प्रेमकृपा उद्योग प्रालि पर काली मिर्च को चमकाने के लिए रंग का प्रयोग किया जा रहा था। इस पर नमूने लिए गए और 4340 किलो काली मिर्च सीज की गई। वहां माहेश्वरी ट्रेडिंग कम्पनी नामक फर्म का काली मिर्च का स्टॉक रखा हुआ था। इस फर्म का संचालक भी हरीश अग्रवाल ही है। मौके पर काली मिर्च के 55 मार्का, सफेद प्लास्टिक मार्का का एक-एक सैम्पल लिया गया।

कर्नाटक से आई थी बेहद घटिया काली मिर्च
जांच-पड़ताल में सामने आया कि सफेद फ्लास्टिक मार्का वाली काली मिर्च बेहद घटिया थी। इसकी आपूर्ति कर्नाटक के चिकमंगलूर से हो रही थी। दोनों ब्रांड के सेम्पल लेने के बाद 55 मार्का के 60-60 किलो के 39 बैग, प्लास्टिक मार्का के 40-40 किलो के 50 बैग मिले।

1500 किलो मूंग का मोगर भी किया सीज
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से वीकेआई में पिंकसिटी फूड प्रोडक्ट पर कार्रवाई की गई। यहां मूंग मोगर तैयार की जाती थी। सैम्पल लेने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों 1500 किलो मूंग मोगर को सीज कर दिया। अधिकारियों की माने तो फर्म के मालिक सौरभ खंडेलवाल ने स्वीकार किया है कि यह दाल वह 33 रुपए में खरीदता था और इसको तैयार करने के बाद 59 रुपए किलो में बेचता था। प्लांट में इसको तैयार भी किया जा रहा था। प्रथम दृष्टया खाने योग्य नहीं है। ये पशु आहार जैसा ही लग रहा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी जयपुर-प्रथम डॉ. नरोत्तम शर्मा के निर्देशन में हुई कार्रवाई के दौरान फर्म के पास पशु आहार का व्यापार करने के कोई लाइसेंस व अन्य कागज भी प्राप्त नहीं हुए हैं। फर्म में ही रिजेक्टेड दालें खरीदने और तैयार कर उनका बेचान पाया है।



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