सुजानगढ़. क्षेत्र के किसान सर्दी के दिनों में बड़ संकट के दौर से गुजर रहे हैं। हालात ये है कि क्षेत्र में दिन में पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से धरती पुत्रों को रात में सिंचाई का कार्य करना पड़ रहा है। ऐसे में कड़ाके की सर्दी में भी इनके हाल बुरे हो गए हैं। ये केवल एक खेत नहीं बल्कि हजारों किसान ऐसे ही हालात में काम करने को मजबूर है। पत्रिका ने जब सर्द रात में किसान के खेत पर पहुंचकर स्थिति देखी तो ऐसा ही नजारा सामने आया। अन्नदाता कड़ाके की सर्दी में रात में सिंचाई करने को मजबूर है। सोमवार रात ११बजे करेजड़ा गांव में के खेतों में सरसों, गेहूं की लहलहाती फसल लहलहा रही थी। किसान टॉर्च लेकर खड़े थे। कुएं पर पानी की मोटर चल रही थी और वे फसलों में पानी दे रहे थे। 40 वर्षीय सुखाराम सारण भी सर्दी में पानी से आधे भीगे हुए थे। किसान सुखाराम ने बताया कि रात को बिजली आती है इसलिए सिंचाई कर रहे हैं। सुबह के चक्कर में फसलें ही चौपट हो जाएगी।
यह है स्थिति
डिस्कॉम ने कृषि कनेक्शन के लिए बिजली आपूर्ति के लिए रोटेशन पद्धति बना रखी है। जिसके तहत माह में 15 दिन आधे किसानों की फसलो को सिंचाई करने के लिए रात को बारी आती है। आधे किसानों की दिन की बारी आती है। ऐसे में कुल मिलाकर जिले के आधे किसान कड़ाके की सर्द रात में सिंचाई का काम करते हैं।
यहां खरीफ व रबी की होती है सिंचाई
जानकारी के अनुसार सुजानगढ़ व बीदासर उपखण्ड क्षेत्र के बाघसरा आथूणा, तेलाप, मून्दड़ा, लिखमणसर, जीली, कानूता, मगरासर, गेडाप, भासीना, उटालड़, नबासर, जोगलसर, कल्याणसर, लालगढ़, बाढ़सर, नोडिय़ा, सडू छोटी व सडू बड़ी, तेहनदेसर, बम्बू, बेरासर, साजनसर, सोनियासर, अमरसर, कातर, शिवपुरी, मालासर, सांडवा, भोमपुरा, आसरासर, गिरवरसर, करेजड़ा, ईयारां, रेड़ा, पारेवड़ा, उड़वाला, काधंलसर, सारंगसर, चरला, गोन्दुसर, ज्याक, घंटियाल छोटी व घंटियाल बड़ी, ढढेरू, मालकसर सहित 6 5 गांव सिंचित क्षेत्र है। इस कारण यहां खरीफ के साथ-साथ रबी की फसलों की बुआई होती है।





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