हिण्डौनसिटी. झगड़े में धारदार हथियारों से हमला कर हुई हत्या करने के दस वर्ष पुराने मामले गुरुवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायधीश क्रमांक-2 ने तीन सगे भाइयों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों अभियुक्तों पर 35 हजार 500 रुपए के अर्थ दण्ड दण्डित भी लगाया है।
अपर लोक अभियोजक जीतेंद्र खैमरिया ने बताया कि बालघाट थाना क्षेत्र के मोडानकापुरा (तिघरिया) निवासी राजंती ेदेवी पत्नी जिन्सीराम गुर्जर ने 26 मार्च को 2008 के करौली जिला चिकित्सालय में घटना के पर्चा बयान दर्ज कराए थे। बयानों में राजंती ने बताया कि 25 मार्च 2008 को शाम करीब 6.30 बजे वह पति जिंसीराम साथ खेतोंं से गेहंू की फसल की कटाई कर घर लौट रहे थे। चंद दूरी चल वे कुए पर पहुंचे तो वहां पहले से ही लाठी व गंडासे लेकर बैठे कुटुम्बीजन हररूप,बबरी, ब्रह्म, मुकेश पुत्रान् टीकम गुर्जर व वीरेंद्र पुत्र हररूप ने एक दिन पहले उनके सिंचाई के पाइप काट दिए थे।
उन्हेें देख जिन्सीराम ने इस उलहाना दिया तो आरोपियों ने दोनों पर लाठी व धारदार हथियारों से हमला कर दिया। शोर मचाने पर पुत्र हेतराम आया तो आरोपियों उससे भी मारपीट कर दी। बाद में आए भाई जीतराम व भाग सिंह ने उन्हें बचाया। सिर में गंभीर चोट लगने से जिंसीराम को हिण्डौन चिकित्सालय से जयपुर रैफर कर दिया। तथा राजंती खुद के उपचार के लिए करौली चिकित्सालय चली गई। उपचार के दौरान जिंसीराम की जयपुर में मौत हो गई। इस पर पुलिस ने हत्या व आर्मस् एक्ट में अधीनस्थ न्यायालय में हररूप, बबरी व मुकेश के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया। अधीनस्थ न्यायालय ने प्रकरण सेंशन न्यायालय में सुनवाई योग्य होने से अपर जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक-२ में कम्मिट कर कर दिया। सुनवाई के दौरान हत्या का दोष साबित होने पर एडीजे क्रमांक-रविकांत जिंदल ने हररूप को जिंसीराम की हत्या का दोषी तथा मुकेश व बबरी को हत्या में सहयोगी होना मानते हुए आजीवन कारावास व 10-10 हजार रुपए के अर्थ दण्ड तथा आर्मस एक्ट में भी कारावास व अर्थदण्ड की सजा सुनाई है।
23 गवाहों के हुए बयान-
अपर लोक अभियोजक जितेंद्र खैमरिया ने बताया विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 21 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। साथ ही 21 दस्तावेज न्यायालय में प्रदर्श किए गए। वहीं आरोपी पक्ष द्वारा 2 गवाहों के बयाना दर्ज करा 9 दस्तावेज प्रदर्श किए।
एक 10 वर्ष से जेल में दो थे जमानत पर-
अपर लोक अभियोजक ने बताया कि पुलिस ने प्रकरण में तीनों आरोपितों को अपे्रल 2008 में गिरफ्तार कर लिया। मुलजित मुकेश व बबरी जमानत पर रिहा चल रहे थे। वही हररुप 10 वर्ष से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। गुरुवार को न्यायालय के फैसला सुनाने के बाद पुलिस ने मुकेश व बबरी को जेल भेज दिया।





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