राजीव दवे
पाली. केन्द्र सरकार के मेक इन इंडिया का सपना साकार करने और युवाओं को स्व रोजगार के प्रति आकर्षित करने के लिए वर्ष 2014 में व्यवसायिक शिक्षा को स्कूली शिक्षा में शामिल किया गया। इसमें एेसे प्रशिक्षणों को शामिल किया गया था। जिनको सीखने के बाद बच्चा स्व रोजगार कर सके और नौकरी की तलाश में नहीं भटके, लेकिन अब इन ट्रेडों में अध्ययन कराने वालों के सामने ही संकट के बादल मंडरा रहे हैं। उनका अनुबंध समाप्त होना बताकर सरकार ने उनको निकालने के आदेश जारी कर दिए है और व्यवसायिक शिक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन व प्रायोगिक परीक्षा के साथ अन्य कार्यों के लिए आइआइटी के माध्यम से कराने के आदेश दिए है। इधर, अब तक स्कूलों में व्यवसायिक शिक्षा पढ़ा रहे शिक्षकों को १८ माह से मानदेय भी नहीं दिया गया है। जिससे उनके सामने आर्थिक संकट भी गहरा गया है।
पाली में हालात
विद्यालय 26
प्रशिक्षक 52
बाधित हो सकते हैं कार्य
व्यावसायिक शिक्षा देकर युवाओं को स्व रोजगार के प्रति प्रेरित करने के लिए कक्षा नौ से बारहवीं तक यह शिक्षा शुरू की गई थी। अब प्रशिक्षकों को हटाने पर प्रश्न पत्र का निर्माण, आंतरिक परीक्षा के कार्य आदि 28फरवरी तक पूरे किए जाने को लेकर कोई स्पष्ट निर्देश नहीं है। एेसे में यह कार्य बाधित होने की आशंका को नकारा नहीं जा सकता।
इन ट्रेड में दिया जाता है प्रशिक्षण
व्यावसायिक शिक्षा में 13ट्रेड का प्रशिक्षण दिया जाता है। इनमें आइटी, हैल्थ केयर, ब्यूटी-वेलनेस, ऑटो मोबाइल, सिक्यूरिटी, रिटेल व्यापार, ट्रेवल्स व टूरिज्म, इलेक्ट्रीकल्स व इलेक्ट्रॉनिक्स, माइक्रो इरिगेशन, होम फर्नीशिंग, प्लम्बर व टेलीकॉम आदि से जुड़े कार्यों का प्रशिक्षण दिया जाता है।
प्रदेश में व्यावसायिक शिक्षा की स्थिति
स्कूलों की संख्या 905
व्यावसायिक प्रशिक्षक 1810
व्यावसायिक शिक्षा प्रारम्भ हुई वर्ष 2014
व्यावसायिक शिक्षा के ट्रेड 13
प्रशिक्षण लेने वाले विद्यार्थी 1 लाख 82 हजार
प्रशिक्षक का वेतन 15 हजार रुपए
अनुबंध समाप्त हो रहा
अनुबंध के आधार पर संविदा शिक्षकों को लगाया गया था। अब अनुबंध समाप्त हो रहा है। स्कूलों में ट्रेड को बंद नहीं किया जाएगा। यह शिक्षा जारी रखी जाएगी।
श्यामसुंदर सोलंकी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, पाली
वेतन दिया नहीं और हटा दिया
व्यावसायिक प्रशिक्षकों को पिछले 18 माह से मानदेय नहीं दिया गया है। इस कारण वे आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। उनको महज 15 दिन का नोटिस देकर हटाया जा रहा है। जो गलत है।
जयनारायण कड़ेचा, जिलाध्यक्ष, अखिल राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत, पाली





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