कोटा. आपके साथ जब कोई खूबसूरत इत्तेफाक होता है तो आपको कोई सिर्फ एक ही पल में पसंद आ जाता है। क्या इसे पहली नजर का प्यार कहते हैं, ऐसा हम नहीं बल्कि वैज्ञानिकों शोधों में सामने आया है कि किसी को देखते ही दिमाग में एक साथ कई केमिकल रिएक्शन होते हैं, किसी को देखकर कुछ-कुछ दिल में नहीं दिमाग में होता है। हमारे हार्मोन ही इन बदलावों को करते हैं। दिमाग ही इन्हें नियंत्रित करता है। यानि, पहली नजर पड़ते ही आपका दिल किसी पर नहीं आता बल्कि आपके दिमाग में कोई आ जाता है। कुछ भी कहें, प्यार की शुरुआत दिल से नहीं दिमाग से होती है।
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एलन इंस्टीटयूट में जीव विज्ञानी और चिकित्सक डॉ. विपिन योगी के अनुसार जब हमारे अंदर लैंगिक लक्षण आने लगते हैं, तब हार्मोन के जरिए आकर्षण की शुरुआत होती है। अगर तब यह हार्मोन की ग्रंथी डिस्टर्ब हो जाए तो बच्चे समलैंगिक हो सकते हैं। वैसे एक अध्ययन में पाया गया कि प्यार दो दिलों का मिलन नहीं बल्कि दो इंसानों के जीन के मिलन का मामला है।
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अध्ययन में पाया गया कि दो इंसानों के बीच आकर्षण ह्यूमन ल्यूकोसाइट एंटीजन की वजह से बढ़ता है। इस जीन के मिलान के बाद ही आकर्षण बढ़ता या घटता है और इस जीन के मिलान का जरिया होती है पसीने की गंध। पुरुषों के पसीने में एंड्रोस्टेडिनोन हार्मोन निकलता है। इस हार्मोन की गंध मिलते ही महिला का दिमाग सक्रिय हो जाता है। दिमाग का अचेतन हिस्सा पसीने की गंध से रोगों से संघर्ष की ताकत-कमजोरी का पता लगाने में जुट जाता है।
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प्यार से बदल जाती हैं हरकतें
मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सा के प्रोफेसर डॉ. भरत सिंह
शेखावत के अनुसार वैज्ञानिक शोधों से ये साफ हो गया है कि इश्क में पड़े इंसान की हरकतें अनायास नहीं होती। इश्क में डूबने के बदलते चरण हमारे दिमाग की दशा में भी परिवर्तन करते हैं। दरअसल इस चरण में शरीर में संवेदी सूचनाओं के डाकिए, सिरोटोनिन का स्तर बढ़ जाता है। जिस भी काम से व्यक्ति को प्लेजर [खुशी] महसूस हो, उससे यह स्तर बढ़ जाता है।
भौतिक से रिश्ता, टेलीफोन का पेटेंट भी आज ही
बात जरा भौतिकी की, कहा जाता है कि रिश्ता जितना लचीला हो, उतना ही लंबा चलता है। वैसे एनर्जी का सिद्धांत देने वाले मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंसटीन की टिप्पणी सारी बात कह देती है। इश्क के बारे में पूछे जाने पर चुटकी लेते हुए उन्होंने कहा था कि इश्क में गिरने के लिए गुरुत्वाकर्षण बल जिम्मेदार नहीं है। प्यार के तार जोडऩे में फोन का बड़ा योगदान है, लेकिन शायद ही लोगों को मालूम होगा कि फोन का वैलेंटाइन डे से भी करीबी रिश्ता है। दरअसल अलेक्जेंडर ग्राहम बेल ने 14 फरवरी 1876 को अपने टेलीफोन का पेटेंट कराया था।





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