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VIDEO सिरोही की एक ऐसी स्कूल जहां पर न पानी हैं और नहीं बिजली, टूटे हुए झूलों पर खेलने पर मजबूर नौनिहाल....

भरत कुमार प्रजापत...

सिरोही. शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में विकास के नाम पर लाखों रुपए खर्च कर रहा है लेकिन आज भी आदिवासी क्षेत्र में कई विद्यालय ऐसे हैं जो मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं। ऐसी ही स्थिति जिला मुख्यालय के समीप राजकीय प्राथमिक विद्यालय राजपुरा खेड़ा की है। यहां नामांकन 18 है लेकिन प्रतिदिन 14-15 विद्यार्थी ही आते हैं। मंगलवार को केवल 8 विद्यार्थी ही उपस्थित थे। इन 18 विद्यार्थियों पर दो शिक्षक कार्यरत हैं।
स्कूल परिसर में प्रवेश करते ही पत्थर ही पत्थर दिखाई दिए। इन पर चलना भी मुश्किल था। उबड़-खाबड़ मैदान होने के कारण कोई खेल भी नहीं खेला जा सकता है। शिक्षकों व विद्यार्थियों को घर से पानी लाना पड़ रहा है। परिसर में ही एक हैण्डपम्प है लेकिन नाकारा पड़ा हुआ है। स्कूल में बिजली की सुविधा नहीं होने से हर काम के लिए सिंदरथ जाना पड़ता है या फिर शिक्षक स्कूल आते समय फोटोकॉपी या अन्य अनिवार्य काम करने के बाद ही आते हैं। स्कूल की चार दीवारी नहीं होने के कारण पशु अंदर घूमते हैं। इस कारण गंदगी रहती है। बच्चों के मनोरंजन के लिए परिसर में झूले लगे हैं लेकिन टूटे होने के कारण कोई बैठता भी नहीं है। पानी की समस्या के कारण उपयोग नहीं होने से शौचालय व मूत्रालय भी जर्जर अवस्था में हैं। विद्यार्थी खुले में ही जाते हैं। टंकी जर्जर हो गई है। शिक्षा विभाग ने प्रत्येक स्कूल को गैस चूल्हे के लिए बजट जारी किया लेकिन यहां के लिए नहीं आया। चूल्हे पर पोषाहार पकाना पड़ रहा है। इससे विद्यार्थियों व शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

पथरीली जमीन से विद्यार्थी परेशान...
सभी बच्चे नहीं आते हैं। बुलाकर लाना पड़ता है। पथरीली जमीन होने के कारण चोट का डर रहता है। बिजली, पानी, चारदीवारी समेत अन्य सुविधा के लिए उच्च अधिकारी व पंचायत को अवगत करवा दिया है। चार दीवारी नहीं होने के कारण बच्चे घर चले जाते हैं।
सुशीला चौहान, संस्था प्रधान, राजपुरा खेड़ा स्कूल, सिरोही



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