आबूरोड. शहर समेत आस-पास में सोमवती अमावस्या और मौनी अमावस्या के अद्भुत संयोग के अवसर पर लोगों ने मंदिरों समेत आस-पास के कुण्ड सरोवरों में आस्था की डुबकी लगाई। जगह जगह कुण्डों पर भोर से ही स्नानार्थियों की भीड जुटनी शुरू हो गई थी। सोमवार के दिन मौनी आमवस्या के होने से लोगों ने मौन रहकर पवित्र स्नान कर दान पुण्य किया। पूजा कर परिवार की सुख शांति की कामना की। महिलाएं स्नान कर पूजा सामग्री के साथ मंदिर पहुंचीं। वहां पीपल के पेड़ों पर प्रदक्षिणा कर बच्चों को खाद्य सामग्री वितरित की गई। कुंभ के समय में पडऩे वाली इस अमावस्या का महत्व अधिक रहेगा। महिलाओं ने सोमवार को व्रत रखकर कथा सूनी।
बदहाल बसों में कैसा सफर
- रोडवेज बसों की समय पर नहीं होती सार संभाल
आबूरोड. राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की भांति उसकी बसों की हालत भी पतली हो गई है। किसी बस के शीशे क्षतिग्रस्त हैं तो किसी की सीट फटी हुई है। टूटे शीशों के कारण बसों में सर्द हवाएं आती है, जिसका खामियाजारोडवेज के यात्रीभार पर भी पड़ रहा है। हकीकत ये है कि जुगाड़ पर चल रही रोडवेज से यात्रियों का मोहभंग हो रहा है। सर्दियों में तो स्थिति और भी विकट हो गई है। शीशों के अभाव में खिड़कियों से हवा आने के चलते यात्री रोडवेज बसों की जगह अन्य वाहनों में यात्रा करना पसंद करने लगे हैं।
निजी की हो रही चांदी
बदहाल बसों के चलने से जहां यात्रियों का रोडवेज से मोहभंग हो रहा है। वहीं निजी बस संचालकों की चांदी हो रही है। सर्दियों में उन्हें बैठे-बिठाए यात्री मिल रहे हैं। आबूरोड से जयपुर तक दिन में सैकड़ों निजी बसों का आवागमन होता है, ऐसे में धीमी गति से चलने वाली बसों के बजाय लोग निजी बसों में यात्रा करते है।
ज्यादातर सीटें फटी हुई
आबूरोड आगार की कई बसों की सीटों के हाल बेहाल है, ऐसे में यात्रा के दौरान कईयों को सीटों पर बैठने के बजाए खड़े रहना पसंद आता है, सीट बीसों बीच में से कट गई है, लेकिन इसकी सार संभाल लेने वाला कोई नहीं है, इसी कारण बसे आए दिन ब्रेक डाऊन भी हो रही हैं।
नाम मात्र की सफाई
बसों में कचरा व गंदगी तो फैलना आम बात है, लेकिन साफ. सफाई करने के लिए बसों की धुलाई का प्रावधान है। रूट से आने के बाद बस में पहले जांच, डीजल भरना चारों और से धुलाई तथा डग, ऑयलिंग समेत विभिन्न प्रक्रिया के बाद दूसरे दिन रूट के लिए तैयार रखा जाता है, लेकिन ऐसा शायद ही होता है। बस के रूट से आने के बाद अन्य रूट पर ऐसे ही रवाना कर दिया जाता है। बसों में कई बार यात्री व बच्चे उल्टी कर देते है या गुटका थूक देते है। ऐसे में बसों में बदबू आती है। कई बार यात्रियों का बैठना मुश्किल हो जाता है।





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