लक्ष्मणसिंह राठौड़ @ राजसमंद
ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण, संवद्र्धन को लेकर कोई गंभीर नहीं है। कुंभलगढ़ दुर्ग परिसर में खुलेआम कई तरह की व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हो रही है, मगर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण महकमे की कार्रवाई नोटिस से आगे नहीं बढ़ पाई। गंभीर बेपरवाही के चलते दिनोंदिन कारोबार बढ़ता जा रहा हैं। ऐसे में पुरा महत्व के दायरे अब सिर्फ कागजों में दबकर रह गए हैं। विभाग ने व्यवसायिक गतिविधियां रोकने व कार्रवाई में मदद के लिए जिला कलक्टर को पत्र लिखा, मगर वृहद स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई।
भारतीय पुरातत्व स्थल संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित स्मारक या उस स्थल के 100 मीटर के दायरे में निर्माण व खनन प्रतिबंधित है। विशेष परिस्थिति में वह भी सार्वजनिक उपयोग में विभाग द्वारा विशेष अनुमति दी जाती है, तभी कोई निर्माण किया जा सकता है, मगर उसमें भी स्मारक व इमारत को कोई नुकसान नहीं पहुंचे, यह मुख्य शर्त है। इसके विपरीत कुंभलगढ़ दुर्ग परिसर में ही रेस्टोरेंट के साथ कई तरह की दुकानें संचालित हो रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से पूर्व में रेस्टोरेंट के साथ हैंडलूम आदि की दुकानें बंद भी करवाई, मगर कुछ दिन बाद फिर कारोबार शुरू हो गया। इससे पुरातत्व अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ रही है।
सड़क किनारे वाहनों से पार्किंग शुल्क
हनुमान पोल से बाहर ज्यादातर वाहन सड़क किनारे खड़े होने के बावजूद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा पार्किंग शुल्क वसूला जा रहा है। विभाग का पार्किंग स्थल बहुत छोटा है, जहां एक दर्जन से ज्यादा वाहन दुर्ग की आबादी क्षेत्र में रहने वाले लोगों के है, जबकि पार्किंग स्थल की क्षमता ही तीस से चालीस वाहन खड़े करने ही है। ऐसे में हनुमान पोल से बाहर पीर बावजी स्थानक व वन विभाग के व्यू पॉइन्ट तक सड़क किनारे खड़े रहने वाले वाहनों से भी पार्किंग शुल्क लिया जा रहा है। सड़क किनारे को पार्किंग स्थल मान लिया, जबकि वहां कोई सुविधा नहीं है। इससे विभागीय कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उल्लेखनीय है नाथद्वारा में हादसे के बाद 120 फीट रोड किनारे भी वाहनों की पार्किंग करवाकर पार्किंग शुल्क वसूलने का खुलासा हुआ और प्रशासन ने वाहनों की पार्किंग बंद करवा दी।
बस्ती को शिफ्ट के प्रयास नहीं सफल
कुंभलगढ़ दुर्ग परिसर की बस्ती को बाहर शिफ्ट करने को लेकर भी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में कवायद शुरू की, मगर उस पर कोई सार्थक प्रयास नहीं हो पाए। इसके चलते न तो बस्ती शिफ्ट हो पाई और न ही दुर्ग परिसर में हो रही अवैध गतिविधियां रूक पाई है। इसके चलते दुर्ग परिसर में ज्यादातर कच्चे मकान अब पक्के हो गए।
करेंगे सख्त कार्रवाई
दुर्ग परिसर में व्यवसायिक गतिविधियां प्रतिबंधित है। इसके लिए सभी को नोटिस देते हुए प्रकरण दर्ज रखे हैं, जिस पर सुनवाई व कार्रवाई प्रक्रियाधीन है। रामपोल के बाहर पार्किंग स्थल छोटा होने व सीजन में ज्यादा पर्यटक आने पर कुछ वाहन सड़क किनारे खड़े करवाते हैं। पार्किंग की समस्या से राहत के लिए नई जगह आवंटित करने की कार्रवाई प्रक्रियाधीन है।
डॉ. वीएस बडिग़र, अधीक्षक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मंडल जोधपुर





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