सवाईमाधोपुर: आंदोलन स्थल पर आंदोलनकारियों के लिए ग्रामीणों की ओर से खाने का भी प्रबंध किया गया। मकसूदनपुरा में देवनारायण मंदिर पर पुड़ी व आलू की सब्जी तैयार की। वहां से ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भोजन रखकर ट्रेक तक ले जाया गया। इसके बाद वहां उसका वितरण किया गया। जबकि आसपास के गांवों से घरों में पकाई रोटी, सब्जी व चटनी पहुंची। जिसे आंदोलनकारी चटकारा लगाकर खाते नजर आए।
आरक्षण आंदोलन की पहली रात
मलारना डूंगर. रात का अंधेरा। खुला आसमान। सनसनाती सर्द हवाएं। रेलवे ट्रैक पर जलते अलाव। अलावों के सहारे रात काटते गुर्जर समाज के आंदोलनकारी। यह नजारा है शुक्रवार अद्र्धरात्रि को दिल्ली-मुम्बई रेलवे ट्रैक पर मलारना-नीमोदा रेलवे स्टेशनों के बीच गुर्जरों के धरना स्थल का। मकसूदनपुरा अंडरपास के ऊपर जगह-जगह झुंडों में आंदोलनकारी बैठे हैं। अप व डाउन ट्रेक पर दोनों ओर एक किलोमीटर तक अलाव जलते नजर आ रहे हैं। सर्द रात में कुछ लोग अलाव के सहारे खुले आसमान तले बैठे है तो कुछ बिना आग के सहारे सर्द रात में डटे है। आरक्षण की मांग को लेकर जोश से लबरेज कहीं बुजुर्ग तो कहीं युवाओं के झुंड गीत गाकर समय व्यतीत कर रहे हैं। जब आंदोलनकारियों से कड़कड़ाती सर्दी में रात गुजारने के बारे में पूछा तो इनका कहना था कि चाहे कुछ भी हो, आरक्षण मिलने तक पटरी पर जमे रहेंगे। सर्दी क्या बरसात भी आई तो पीछे नहीं हटेंगे।





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