रणजीतसिंह परिहार
मंडार. मंडार-गुन्दवाड़ा मार्ग पर स्थित दूधेश्वर महादेव मंदिर में गुरुवार को गुजरात धनियावाड़ा महंत गणेशगिरी की निश्रा और महावीरसिंह देवड़ा की अध्यक्षता में महंत दानगिरी महाराज का दो दिवासीय षोड्शी भंडारा शिकारपुरा के संत सांवलाराम महाराज की मौजूदगी में हुआ। इस मौके पर मंडार ग्रामीणों व आंजणा समाज मंडार थाला के लोगों ने संतों, महंतो का परम्परागत रूप से स्वागत किया। इसके पूर्व संध्या पर आयोजित भंक्ति संध्या में जालोर के जोगभारती एण्ड पार्टी की ओर से स्वर लहरियों की धुन पर एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी तथा कलाकारों नें विभिन्न प्रकार के स्वांग रचाकर मटकी, ज्वाला समेत भाव नृत्यों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को तड़के तक बांधे रखा।
सुबह शिकापुरा के संत सांवलाराम समेत संतों व महंतों के पहुुुंचने पर बाजे-बाजे के साथ ग्रामीणों व आंजणा समाज के लोगों नें उनका स्वागत किया। महंत लहरभारती, महंत करणगिरी, जोडवाड़ा की राधागिरी, महंत रजनगिरी व तीर्थगिरी ने भक्ति से ओतप्रोत भावात्मक विचार व्यक्त किए। भंडारे में आयोजित फले-चूंदड़ी को लेकर आस-पास गांवों तथा गुजरात क्षेत्र के लोगों ने भाग लिया। इस दौरान रेवदर वृताधिकारी वीराराम, रेवानाथ अखाड़े के लहरभारती, तीर्थगिरी, शंभुनाथ, गिरधरगिरी, कैलाशगिरी, रोहितगिरी, रतनगिरी, सुखदेवगिरी, वीरमगिरी, सेवागिरी,ओंमकागिरी, दयालगिरी, प्रेमगिरी, करणगिरी समेत दर्जनों संतों की मौजूदगी रही।
भजन संध्या का आयोजन
भक्ति संध्या में भजनकलाकार जोगभारती व गीता गोस्वामी ने एक से एक बढ़कर प्रस्तुति देकर श्रोताओं को तड़के तक बांधे रखा। कलाकारों ने गणेश वंदना के साथ भजनों की प्रस्तुति के साथ गुरुवंदना, बजरंग बालाजी,जैसल धाडवी, कृष्ण-सुदामा पर कन्हैया से कह दो समेत कई भजनों की प्रस्तुति दी। तरूण मनोहर प्रजापति, कैलाश मोदी ने भाव-नृत्यों व मटकी नृत्यों की प्रस्तुति देकर समां बांधा। युवाओं ने भजनों की धून पर जमकर नृत्य किए।





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