आबूरोड. आजादी के बहत्तर सावन बीतने के बावजूद आज भी तहसील क्षेत्र के आदिवासी बहुल में दीये की रोशनी के तले बच्चे पढ़ाई करते हैं। रात्रि में कई फलियों के आदिवासी आज भी रोशनी की बाट जोह रहे हैं, लेकिन सरकार के प्रयास यहां विफल होते नजर आ रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल कुई सांगणा क्षेत्र में विभिन्न फलियों में निवासरत ग्रामीणों को आज भी बिजली जैसी सुविधा नहीं मिल सकी है, वैसे तो केंद्र सरकार की ओर से पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पहुंचाने के लिए कयास लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन आदिवासी बहुल क्षेत्र में बिजली दूर की कौड़ी नजर आ रही है।
जानकारी के अनुसार कुई सांगणा के डाबी फली व निचला सांगणा में कई परिवार बिजली कनेक्शन के अभाव में खासी परेशानी से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत मुख्यालय में आयोजित शिविर में कुछ माह पूर्व बिजली कनेक्शन के लिए फाइल जमा करवाई गई थी। जिसके बाद पंचायत क्षेत्र में कुछ इलाकों में तो खम्भे लगाए गए, लेकिन कई फलियों में अब भी बिजली के पोल नहीं लगे हैं। डाबीफली, निचला सांगणा समेत आसपास के इलाकों में निवासरत कई परिवार बिजली कनेक्शन से वंचित है।
अंधेरे में मोमबत्ती की रोशनी में पढ़ाई की विवशता
बिजली के अभाव में शाम होते ही लोगों को मोमबत्ती व दीये की रोशनी में ही रात गुजर जाती है। ऐसे में सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली छात्रों को ही होती है। ग्रामीणों ने बताया कि रात्रि में बच्चों को बिजली के अभाव में दीये की रोशनी में ही पढ़ाई करनी पड़ती है।
फाइल जमा किए महीने बीते, पर नहीं मिली बिजली
निचला सांगणा निवासी भीखाराम पुत्र जोराराम ने बताया कि फली में करीब चार सौ से पांच सौ की आबादी निवासरत है, लेकिन अधिकतर परिवार बिजली कनेक्शन से वंचित है। उन्होंने छह माह पूर्व शिविर में फाइल जमा करवाई थी, लेकिन अब तक कनेक्शन नहीं मिला। सांगणा डाबीफली निवासी अणदाराम पुत्र करमाराम गरासिया ने बताया कि आठ माह पूर्व फाइल विभाग में जमा करवाई थी, लेकिन अब तक कनेक्शन नहीं मिला है। बिजली नहीं होने से खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।





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