Breaking News
recent

20 साल बाद भी नहीं खुला संस्कृत महाविद्यालय

रटलाई. संस्कृत पढऩे के लिए उच्च शिक्षण संस्थान नहीं होने से कई प्रतिभावान छात्रों को दूसरे जिले के शास्त्री महाविद्यालय में जाना पड़ रहा है। कस्बे में वर्षों से राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय संचालित है, लेकिन संस्कृत महाविद्यालय नहीं है। छात्रों को शास्त्री और आचार्य (बीए व एमए) की शिक्षा लेने के लिए कोटा, उदयपुर, जयपुर आदि जगहों पर जाना पड़ता है। वहीं बालिकाओं को 12 वीं के बाद छात्राओं को पढ़ाई छोडऩी पड़ती है ।
जिले का राजकीय आदर्श वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय सबसे पुराना है, विद्यालय रिकॉर्ड के अनुसार कस्बे का यह संस्कृत विद्यालय प्राथमिक विद्यालय में राज्य सरकार के 29 सितम्बर 1984 के आदेश से खोलने की घोषणा की थी, जो 18 अक्टूबर 1985 को यहां पर विधिवत रूप से संस्कृत विद्यालय में पढ़ाई होने लगी। करीब 4 वर्ष बाद 1989 में प्रवेशिका एवं जुलाई 1999 में वरिष्ठ उपाध्याय में क्रमोन्नत किया। वहीं विभागीय नियमों के अनुसार वरिष्ठ उपाध्याय को 6-7 वर्ष में क्रमोन्नत कर दिया जाता है, लेकिन 20 वर्ष बाद भी संस्कृत महाविद्यालय नहीं खुला है।
प्रस्ताव मांगे
संस्कृत शिक्षा निदेशालय द्वारा रटलाई में संस्कृत महाविद्यालय खोलने के लिए राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय को संस्कृत महाविद्यालय में क्रमोन्नत करने के लिए राजस्थान सरकार ने संस्कृत शिक्षा निदेशालय से 9 अगस्त 2010 में प्रस्ताव मांगे थे। इसके बाद निदेशालय ने लगातार उक्त विद्यालय से 10 अक्टूबर 2010, 12 सितम्बर 2011 एवं 26 अक्टूबर 2012, 2014 जनवरी 2019 को संस्कृत महाविद्यालय खोलने के लिए प्रस्ताव मांगे। विद्यालय ने समय पर प्रस्ताव नहीं । लेकिन प्रस्ताव पर अमल नहीं हुआ।
क्षेत्र में बालिकाओं को 12 वीं के बाद पढ़ाई बंद करनी पड़ती है। कई बालिकाएं कॉलेज की शिक्षा से वंचित रह चुकी हैं। कस्बे के राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय को संस्कृत महाविद्यालय में कमोन्नत या महाविद्यालय खुलाने के लिए पिछले 18-20 वर्षों से अधिक समय से कस्बे के लोगों व जनप्रतिनिधियों के द्वारा कई बार लिखित ज्ञापन मुख्यमंत्री, संस्कृत शिक्षा मंत्री, विधायक, जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों को समय-समय पर दिए, लेकिन ढाक के तीन पात साबित हो गए। इसके कारण जिले में राजकीय संस्कृत (शास्त्री) महाविद्यालय नहीं हैं।
जिले में 43 विद्यालय फिर भी नहीं आला अधिकारी
शायद संस्कृत ही एक ऐसा विभाग है, जिसका जिले में संस्कृत शिक्षा के नाम पर कोई जिला शिक्षा अधिकारी नहीं होता है, इसके कारण यहां के विद्यालयों एवं गतिविधियों के लिए कोटा के संभागीय शिक्षा अधिकारी के यहां पर जाना पड़ता है। लेकिन वरिष्ठ उपाध्याय विद्यालय के प्राचार्य ही जिले का प्रथम अधिकारी होता है। जिलें में 2 वरिष्ठ उपाध्याय, 4 प्रवेशिका एवं उच्च प्राथमिक सहित 37 विद्यालय हैं । इस प्रकार से जिले का संचालन वरिष्ठ उपाध्याय रटलाई एवं खेड़ला के विद्यालयों द्वारा किया जाता है। जिसके कारण संस्कृत विद्यालयों में आने वाली समस्याओं का समय पर निस्तारण नहीं हो पाता है।
जनवरी 2019 में संस्कृत महाविद्यालय के प्रस्ताव भेजे हैं। संस्कृत शिक्षा निदेशालय द्वारा वर्ष 2019 में विद्यालय से रटलाई में संस्कृत महाविद्यालय खोलने के लिए प्रस्ताव मंागे थे। इस पर विद्यालय ने विभाग स्तर प्रस्ताव बनाकर 28 जनवरी 2019 को फिर भेजे हैं। जिसमें कस्बे में संस्कृत महाविद्यालय खोलने के लिए ग्राम पंचायत के भूमि पत्र सहित कई प्रकार के दस्तावेज के साथ प्रस्ताव संस्कृत शिक्षा विभाग को भेजे हैं।
हरिशंकर रैगर, प्राचार्य, वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, रटलाई



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.