सीकर.
सरकारी महकमों में एक मिनट के लिए बिजली कटे तो अधिकारियों को नागवार गुजर जाता है। लेकिन बिल देने में हमेशा फिसड्डी रहने के बाद भी विद्युत निगम भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। आम आदमी का दो महीने का बिल जमा नहीं होता तो निगम से कनेक्शन काटने के नोटिस मिल जाते है। इधर, निगम इन अधिकारियों से बिल जमा कराने के लिए बोलने से भी कतराते हैं। जिले के सरकारी क्वार्टस, फतेहपुर व सीकर जेल, वन विभाग, उपखंड व तहसील कार्यालय, पुलिस थाने एवं स्मृति वन आदि को मिलाकर कुल 74 सरकारी महकमों में 49.9 लाख रुपए का बिल बकाया चल रहा है। इनमें से कई अधिकारी तो ऐसे हैं जिनका महीनों पहले यहां से तबादला हो गया लेकिन विद्युत बिल अभी तक बकाया है।
कैसे जमा हो बिल
वर्षों सरकारी महकमों में रहने के बाद तबादला होते ही अधिकारी दूसरी जगह चले जाते है। ऐसे में लंबे समय से बकाया चल रहे बिजली बिल बकाया छोड़ जाते है। नए अधिकारी आने के बाद पिछले बिल जमा कराने से वो साफ इंकार कर देते है। उनका कहना है कि हम वर्तमान बिल जमा करा सकते है। बिलों से हमारा क्या मतलब है।
इन विभागों के बकाया
बकाया बिलों की सूची में सबसे ऊपर स्मृति वन का 8 लाख रुपए का बिल है। इसके बाद सीकर जेल का पांच लाख रुपए, फतेहपुर जेल का डेढ़ लाख रुपए, एईएन पीड्ब्ल्यूडी जयप्रकाश के एक लाख 14 हजार 795 रुपए, गौतम चंद जैन 73 हजार 451 रुपए, आरआई निरीक्षक पुलिस लाइन सीकर के 27 हजार रुपए, एईएन पीड्ब्ल्यूडी अनिल कुमार के 20 हजार 721 रुपए तथा पुलिस लाइन के अन्य क्वार्टस को मिलाकर 22 हजार 729 रुपए का बिल बकाया चल रहा है।





No comments:
Post a Comment