बाड़मेर.
दो मासूम बच्चे। 4 साल का इमिया और 8 साल का रमेश। पिता जालाराम और उसकी पत्नी दोनों दिव्यांग। पहले ही हाल खराब थे, पिछले दिनों उनके झोपड़े में लगी आग ने रहा-सहा सबकुछ छीन लिया। सरकारी सहायता कहीं नहीं मिली तो मजबूर पिता रामसर गांव का दिव्यांग 55 साल का जालाराम अपने दोनों मासूमों के साथ 60 किमी दूर जिला कलक्टर तक अपनी पीड़ा सुनाने रामसर से बाड़मेर के लिए निकल पड़ा। खुद ट्राइसाइकिल चलाता रहा और दोनों मासूम ट्राईसाइकिल को धक्का देकर आगे बढ़ते रहे। बारी-बारी धक्के मारने और बाड़मेर तक पहुंचने का यह सफर इन तीनों पिता-पुत्र ने 16 घंटे में तय किया।
शुक्रवार को जालाराम ने कलक्टर से मुलाकात की और बताया कि उसकी स्थिति दयनीय है। आग में घर का सारा सामान व कच्चा घर जलकर राख हो गया। वह जैसे-तैसे गांव में रह रहा है। संक्रमण के कारण पांव पूरा खराब हो गया है, चिकित्सकों के अनुसार पांव को कटवाना है, उसने नि:शुल्क उपचार करवाने की गुहार लगाई।
न आवास, न विद्युत कनेक्शन मिला
उसने बताया कि उसका घर और कच्ची ढाणी कुछ दिन पहले आग लगने से जल गई। गरीब होने के बावजूद उसे न तो आवास मिला है और न ही विद्युत कनेक्शन। दोनों मासूम बेटों की शिक्षा भी अधरझूल में है। पेंशन की राशि में परिवार का पालन-पोषण भी हो पा रहा है।
सहायता करेंगे
दिव्यांग मिला था। मामला समाज कल्याण विभाग को भिजवाया गया है। हर संभव सहायता की जाएगी। पेंशन मिल रही है।
हिमांशु गुप्ता, जिला कलक्टर, बाड़मेर





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