कोटा. कोटा में एक बार फिर अंगदान की उम्मीद टूटने के साथ ही विशाल की बॉडी को इसके लिए जयपुर के एसएमएस हॉस्पीटल रवाना कर दिया गया। रास्ते में किसी तरह की कोई रुकावट न आए इसलिए पुलिस और प्रशासन ने मैत्री हॉस्पीटल से लेकर जयपुर तक विशाल को ले जाने वाली एंबुलेंस को एक्सकॉर्ट मुहैया कराई है।
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अंगदान की उम्मीद पूरी होना तो दूर दो दिनों तक मृत घोषित होने तक के लिए दो दिनों तक इंतजार करते रहे विशाल को आखिरकार बुधवार रात 11.45 बजे हाईली इक्युप्ड एंबुलेंस से जयपुर के एसएमएस अस्पताल के लिए रवाना कर दिया गया। इससे पहले कोटा ब्रेन डैड कमेटी ने रात ग्यारह बजे से फाइनल एपनिया टेस्ट शुरू किया। रात 11.05 बजे इसकी रिपोर्ट आई जिसमें उसे ब्रेन डैड घोषित कर दिया गया।
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चिकित्सकों की निगरानी
डिस्ट्रिक्ट ब्रेन डैड कमेटी के चेयरमैन डॉ. विजय सरदाना ने बताया कि विशाल के साथ मेडिकल कॉलेज के डॉ. खालिक (एनीस्थिसीया) और डॉ. विनोद (मेडिसन) के साथ-साथ नर्सिंग स्टाफ भी एंबुलेंस में भेजा गया है। जो पूरे रास्ते उसकी निगरानी करेंगे। एंबुलेंस में वेल्टिनेटर आदि की पूरी सुविधा है। हालांकि कोटा में अस्थाई ऑर्गन रिट्राइवल सेंटर की मंजूरी न मिलने की वजह पर उन्होंने स्वास्थ्य निदेशक की ओर से आए पत्र में इसका कोई जिक्र न करने की बात कही।
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एक्सकॉर्ट खोलेगी रास्ता
एसपी दीपक भार्गव ने बताया कि विशाल को जयपुर ले जाने के लिए रास्ते में किसी तरह की रुकावट न आए इसके लिए एंबुलेंस के आगे पुलिस एक्सकॉर्ट लगाया गया है। पूरे सफर में रास्ता साफ मिले यह तय करने के लिए सभी संबंधित पुलिस थानों को विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। हाईवे पेट्रोलिंग को भी एलर्ट किया गया है। जहां जहां चौराहे या मोड़ हैं वहां पहले से ट्रेफिक भी रोककर रखा जाएगा।
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नहीं मानूंगा हार
बेटे का कोटा में अंगदान न होने से पिता नरेश कपूर खासे निराश हुए। उन्होंने कहा कि चिकित्सकों के आपसी विवाद के चलते बेटे को ब्रेन डैड घोषित कराने में भी दो दिन लग गए। ऐसा शायद पहली बार ही हुआ होगा कि कोई आदमी मरने के बाद भी उसे प्रमाणित कराने के लिए आईसीयू में पड़ा संघर्ष कर रहा हो। तमाम रुकावटों के बावजूद मैं हार नहीं मानने वाला, इसलिए आखिरी कोशिश करने को बेटे को लेकर जयपुर जा रहा हूं, ताकि अंगदान के संकल्प को हर हाल में पूरा कर सकूं। जो हुआ बेहद दुखद था। उम्मीद है कि इसके बाद प्रशासन और सरकारें सबक लेंगी एवं जल्द से जल्द कोटा में ऑर्गन रिट्राइवल सेंटर स्थापित किया जा सकेगा।





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