बीकानेर. 'जोधाणे सूं म्हारो बीज तो हे मंगायाÓ , 'हे सइयां म्हारी अे, जगाई काची नींद मेंÓ, 'चालो-चालो नगीने रे देसÓ, 'हाथ रो हमारो एक दाव हो चतर ढोलाÓ सरीखे गीतों से हेड़ाऊ मेहरी रम्मत का अभ्यास परवान पर है। होलाष्टक के दौरान बारह गुवाड़ चौक और मरुनायक चौक में होने वाली इन रम्मतों के अभ्यास उस्तादों और वरिष्ठ कलाकारों के निर्देशन में देर रात तक चल रहे हैं। नगाड़ा और छमछमा की संगत के बीच रूसणो, मनावणो, गीगो, नीम्बूडो, छैला मारु, नगीनो, थोरा वचन, दारुड़ो, घुंघटड़ो, क्यू मरोड़ी, पायल सहित रम्मत के अन्य गीतों के गायन-अभ्यास में बड़ी संख्या में कलाकार और रम्मतों के शौकिन शामिल हो रहे हैं। विशिष्ट है गायन-संवाद शैली
होलाष्टक में होने वाली हेडाऊ मेहरी रम्मत के गीतों और संवाद की विशिष्ट गायन शैली लोकप्रिय है। रम्मत कलाकार बी आर सूरदासाणी बताते हैं कि यह रम्मत हेड़ाऊ, नुरसा और मेहरी पात्रों के माध्यम से मंचित होती है। हेड़ाऊ और नुरसा पात्रों के माध्यम से गीत-संवाद होते है। हेड़ाऊ के आगे मेहरी पात्र नृत्य करते रहते है।
दो स्थानों पर मंचन
मरुनायक चौक में १८ मार्च की रात व १९ मार्च की सुबह तथा बारह गुवाड़ में १९ मार्च की रात व २० मार्च की सुबह तक हेड़ाऊ मेहरी रम्मत का मंचन होगा। मरुनायक चौक में उस्ताद अजय कुमार देरासरी के सान्निध्य में रम्मत का अभ्यास परवान पर है। यहां वरिष्ठ कलाकार गेवरचंद भादाणी, प्रभु लखाणी, मेघराज जोशी, दाराचंद जोशी, बल्लू जोशी, रघु जोशी, राजेश जोशी, राजेश देरासरी, विष्णु सेवग आदि अभ्यास में जुटे हैं। नगाड़े पर संगत रामदेव सेवग और अशोक सेवग कर रहे हैं। बारह गुवाड़ में उस्ताद शांतिलाल पुरोहित के सान्निध्य में बृजमोहन पुरोहित, शिव शंकर पुरोहित, भंवर लाल पुरोहित, राधाकिशन पुरोहित, राजकुमार रंगा, बुलाकी दास आदि अभ्यास में जुटे हैं। नगाड़े पर संगत कन्हैया लाल व शिव कुमार दे रहे हैं।
परम्परा का निर्वहन
रियासतकालीन परम्परा के तहत मरुनायक चौक में सोमवार दोपहर १२ बजे थंब पूजन मंत्रोच्चार के बीच होगा। मरुनायक मंदिर के ट्रस्टी घनश्याम लखाणी ने बताया कि थंब पूजन कार्यक्रम के दौरान भूमि पूजन, थंब पर विराजित देवताओं का अभिषेक पूजन, थंब रोपण का कार्यक्रम होगा।





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